संगठन में बदलाव का कांग्रेस को चुनावों में कितना मिलेगा फायदा?

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस इस वक्त बुरे दौर से गुजर रही है। पांच राज्यों में हुए विधान सभा चुनाव में वो सिर्फ एक राज्य तेलंगाना ही जीत पाई।

ऐसे में उसके सहयोगी दल भी उसपर दबाव बना रहे हैं। दरअसल इंडिया गठबंधन में शामिल सपा से लेकर आप ने सीटी शेयरिंग को लेकर कांग्रेस पर अच्छा खासा दबाव बना डाला है लेकिन क्षेत्रीय पार्टियों को ये मालूम है कि मोदी को अगर रोकना है तो कांग्रेस को बड़ी भूमिका में रहना होगा।

उधर कांग्रेस भी लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपने संगठन में भारी बदलाव करती हुई नजर आ रही है। उसने अब वो कदम उठाया है जिसके बारे में पहले भी चर्चा हो रही थी।

कांग्रेस ने नौजवानों को आगे किया ताकि लोकसभा चुनाव में उसे बेहतर परिणाम मिल सके। कांग्रेस की दिग्गज नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को अब उत्तर प्रदेश से हटा दिया गया ताकि वो अन्य राज्यों में कांग्रेस को जीत दिलाने के लिए मेहनत करे।

प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी @PHOTO SOCIAL MEDIA

प्रियंका गांधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी पद से हटाने का बड़ा फैसला लिया गया लेकिन उनको अभी महासचिव बनाया रखा गया ताकि अन्य राज्यों में उनकी मदद ली जा सके। दूसरी तरफ राजस्थान में बड़ा बदलाव किया गया है। दरअसल अब कांग्रेस अब वहां पर नया चेहरा खोज रही है।

इसी रणनीति के तहत सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सौंपी गई है इससे पहले कांग्रेस ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नेशनल अलायंस कमेटी में शामिल किया था।

इससे ये पता चल रहा है कि राजस्थान में कांग्रेस अब कुछ नया करना चाहती है और वहां पर गहलोत और पायलट से अलग सोच रही है। 21 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई थी।

जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में मिली हार की समीक्षा के साथ-साथ लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर बात हुई थी। इसके बाद कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया है। अब देखना होगा कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को कितना फायदा मिलता है।

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