ग्रेटर नोएडा श्रमिक हिंसा: पुलिस वैन पलटी, कंपनियों में तोड़फोड़; ₹26,000 न्यूनतम वेतन की मांग पर अड़े मजदूर

दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सोमवार की सुबह युद्ध के मैदान में तब्दील हो गई। वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से चल रहा श्रमिकों का प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली।

होल्ड-अप और हिंसा: क्या हुआ फेज-2 में?

सोमवार सुबह ग्रेटर नोएडा के फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स (डी ब्लॉक) में हजारों की संख्या में श्रमिक एकत्रित हुए। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया:

  • तोड़फोड़ और आगजनी: गुस्साए मजदूरों ने कंपनियों के शीशे तोड़े और परिसर में खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
  • पुलिस पर हमला: भीड़ ने मौके पर मौजूद पुलिस बल पर भारी पथराव किया और पुलिस की एक वैन को पलट दिया।
  • पुलिस की जवाबी कार्रवाई: स्थिति को बेकाबू होते देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) किया। फिलहाल पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और पीएसी (PAC) की तैनाती की गई है।

गुरुग्राम से नोएडा तक ‘आंदोलन की आग’

यह आंदोलन महज स्थानीय नहीं है। इसकी चिंगारी गुरुग्राम से उठी थी, जो अब नोएडा के औद्योगिक गलियारों तक पहुंच गई है। फेज-2 और ईकोटेक थर्ड क्षेत्र की करीब 500 से अधिक कंपनियों के कर्मचारी इस आंदोलन से सीधे तौर पर जुड़े बताए जा रहे हैं। सड़क जाम होने के कारण सुबह ऑफिस जाने वाले लोगों और दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

श्रमिकों की ’26 हजार’ वाली मांग

आंदोलनकारी मजदूरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा मजदूरी में गुजारा नामुमकिन है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. न्यूनतम वेतन: प्रति माह ₹26,000 सुनिश्चित किया जाए।
  2. ओवरटाइम: अतिरिक्त काम का भुगतान दोगुनी दर पर हो।
  3. कार्य दशाएं: 10-12 घंटे के बजाय तय वर्किंग आवर्स और साप्ताहिक अवकाश।
  4. कानूनी सख्ती: कंपनियों में श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन हो।

प्रशासन का रुख: 24 घंटे का कंट्रोल रूम स्थापित

गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने जनता से शांति की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन श्रमिकों की समस्याओं के प्रति गंभीर है।

  • कंट्रोल रूम: मजदूरों की शिकायतों के लिए 24 घंटे का हेल्पलाइन सेंटर शुरू किया गया है।
  • निर्देश: उद्योग प्रतिनिधियों को वेतन समय पर देने और ओवरटाइम का सही भुगतान करने के कड़े आदेश दिए गए हैं।

हालांकि, इन आश्वासनों के बावजूद श्रमिक झुकने को तैयार नहीं हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में तनाव बरकरार है।

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