सोने-चांदी में शुरुआती कारोबार में गिरावट, डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों की बैठकों से बाजार सतर्क

सोमवार (16 मार्च) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और इस सप्ताह होने वाली प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों से पहले निवेशकों के सतर्क रुख ने बुलियन बाजार पर दबाव बनाया है।
कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर गोल्ड फ्यूचर्स करीब 56.70 डॉलर यानी लगभग 1.12 फीसदी गिरकर 5,005 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं सिल्वर फ्यूचर्स 1.738 डॉलर यानी करीब 2.14 फीसदी की गिरावट के साथ 79.605 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
बाजार में सतर्कता
वैश्विक बाजार फिलहाल सतर्क माहौल में हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में जारी टकराव के कारण तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी हुई है। तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकती हैं, जिस पर नीति निर्माता नजर बनाए हुए हैं।
केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर नजर
इस सप्ताह कई प्रमुख केंद्रीय बैंक—अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड—अपनी मौद्रिक नीति के फैसले घोषित करने वाले हैं। बाजार को फिलहाल उम्मीद है कि ब्याज दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन निवेशक आगे की नीतिगत दिशा को लेकर दिए जाने वाले संकेतों पर खास नजर रखेंगे।
विशेषज्ञों की राय
JM फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक निवेशक पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए हैं। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता या कम होता है, तो बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण यह संभावना बढ़ गई है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने में देरी कर सकते हैं, जिससे बुलियन कीमतों पर दबाव बना है।
सुरक्षित निवेश की मांग का सहारा
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी की मांग बनी रह सकती है, जो कीमतों को कुछ हद तक सहारा दे सकती है।
चांदी पर भी दबाव
चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिल रही है। औद्योगिक धातुओं में उतार-चढ़ाव और डॉलर की मजबूती इसका प्रमुख कारण है। आम तौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए कीमती धातुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर
बाजार की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बनी हुई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम समुद्री मार्ग है। खबर है कि कई देश मिलकर इस रूट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए एक गठबंधन बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत दिशा को लेकर अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।


