Shaheed Diwas 2025 : महात्मा गांधी को जवाब चाहिये

नई तालीम के आधार पर लोगों को मुफ्त शिक्षा दी जाये . लोगो को लोकतंत्र और मताधिकार का महत्व समझाया जाए और उसके लिए प्रेरित किया जाये . उन्होंने सत्ता के विकेन्द्रीकरण , धर्म ,मानवता ,समाज और राष्ट्र सहित उन तमाम मुद्दों की तरफ लोगों का ध्यान खींचा जो आज भी ज्वलंत प्रश्न है.वे और उनके विचार आज भी जिन्दा है और प्रासंगिक है . अमेरिका में कुछ वर्ष पूर्व जब हिलेरी क्लिंटन ने बापू पर कोई हलकी बात कर दिया तों अमेरिका के लोगों ने ही इतना विरोध किया की चार दिन के अन्दर ही हिलेरी को खेद व्यक्त करना पड़ा .

गुजरात की घटनाओं के समय जब हैदराबाद में दो समुदाय के हजारों लोग आमने -सामने आँखों में खून तथा दिल में नफरत लेकर एकत्र हो गए ,तों वहा दोनों समुदाय की मुट्ठी भर औरतें मानव श्रृंखला बना कर दोनों के बीच खड़ी हो गयी. यह गाँधी का बताया रास्ता ही तों था ,वहा विचार के रूप में गाँधी ही तों खड़े थे | कुछ साल पहले अहिंसा के पुँजारी बापू के घर गुजरात में राम , रहीम और गाँधी तीनो को पराजित करने की चेष्टा हुई ,लेकिन हत्यारे ना गाँधी के हो सकते है ,ना राम के ना रहीम के.

और गुजरात कांड के हीरो पता नहीं कैसे महात्मा गांधी का नाम लेने और लगातार लेने कि हिम्मत जुटा रहे है । समय बताएगा कि बापू और सरदार का नाम लेने के पीछे असली मंशा क्या है .

महात्मा गांधी तो नहीं मरे ,फिर हत्यारे ने मारा किसे था ? ऐसे सिरफिरे लोग और उनके संगठन कितनी हत्याएं करेंगे ?पिछले 77 वर्षों में भी वे गाँधी को नहीं मार पाया है.

वह कौन सा दिन होगा जब फासीवादी लोग गांधी की पूर्ण हत्या करने में कामयाब हो पाएंगे ? सचेत रहना पड़ेगा की फासीवादी ताकतें अचानक बापू का इस्तेमाल करने लगी ?

इसके पीछे देश को हिटलर की तरह भ्रमित कर सत्ता हथियाई और फासीवाद थोप कर बापू की अंतिम हत्या करने का उद्देश्य तो नहीं है ? जिम्मेदारी और जवाबदेही बापू को मानने वालो की है की सत्ता की ताकत से महात्मा गांधी को बौना करके ,उन्हें गाली देने और गोली मरने वालो से मानवता को बचाएं और देश को बचाएं .

रास्ता वही होगा जो गांधीजी ने दिखाया था . 74वा वर्ष जवाब चाहता है दोनों से की फासीवादियों तुमने गांधी को मारा क्यों था ?उद्देश्य क्या था ? तुम कहा तक पहुंचे ? उनके मानने वालो से भी कि आर्थिक गैर बराबरी , सामाजिक गैर बराबरी के खिलाफ , नफ़रत और शोषण के खिलाफ बापू द्वारा छेड़ा गया युद्ध फैसलाकुन कब तक होगा ?

उनके सपनो का भारत कब तक बनेगा ? इन सवालो के साथ महात्मा गांधी तथा उनके विचार आज भी जिन्दा है और कल भी हमारे बीच मौजूद रहेंगे .

(लेखक स्वतंत्र राजनीतिक चिंतक और वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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