Friday - 30 January 2026 - 2:34 PM

समय से आगे बढ़ता महात्मा गांधी : एक वैश्विक संत की निरंतर उभरती महानता

प्रो.(डॉ.) सुमन कुमार शर्मा 

30 जनवरी का दिन भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए आत्ममंथन का अवसर है। यह दिन महात्मा गांधी की शहादत की स्मृति से जुड़ा है—एक ऐसे व्यक्तित्व की, जिनका जीवन और विचार समय के साथ और अधिक प्रासंगिक, प्रभावशाली और प्रेरणादायी होते जा रहे हैं। आज केवल भारत के राष्ट्रपिता नहीं हैं, बल्कि वे विश्व-मानवता के नैतिक पथप्रदर्शक और “वैश्विक संत” के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके हैं।

गांधी जी की महानता किसी एक घटना, आंदोलन या राष्ट्र तक सीमित नहीं थी। सत्य और अहिंसा जैसे उनके सिद्धांत सार्वकालिक और सार्वभौमिक हैं। जैसे-जैसे दुनिया हिंसा, युद्ध, आतंकवाद, असहिष्णुता और नैतिक पतन की चुनौतियों से जूझ रही है, वैसे-वैसे गांधी के विचार और अधिक उजागर होकर सामने आ रहे हैं। आज वैश्विक मंचों पर, संयुक्त राष्ट्र से लेकर विश्व के प्रमुख विश्वविद्यालयों तक, गांधी के विचारों पर विमर्श हो रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि उनकी महानता समय के साथ क्षीण नहीं हुई, बल्कि निरंतर बढ़ी है।

महात्मा गांधी का जीवन स्वयं एक जीवंत प्रयोगशाला था—जहाँ विचार और आचरण में कोई अंतर नहीं था। वे जो कहते थे, वही जीते थे। सादगी, आत्मसंयम, सत्यनिष्ठा और करुणा उनके जीवन के मूल तत्व थे। आज जब भौतिकता और उपभोगवाद समाज को दिशा दे रहे हैं, गांधी का “सादा जीवन, उच्च विचार” का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। जलवायु परिवर्तन, संसाधनों का अंधाधुंध दोहन और पर्यावरण संकट के दौर में गांधी का प्रकृति के साथ संतुलन का दृष्टिकोण विश्व के लिए मार्गदर्शक बन रहा है।

गांधी जी ने यह सिद्ध किया कि शक्ति केवल हथियारों में नहीं, बल्कि नैतिक साहस में होती है। बिना हिंसा के, बिना घृणा के, उन्होंने एक विशाल साम्राज्य को झुकने पर विवश कर दिया। आज दुनिया के अनेक सामाजिक और नागरिक आंदोलन—चाहे वे नस्लभेद के विरुद्ध हों, मानवाधिकारों के लिए हों या शांति स्थापना के प्रयास—कहीं न कहीं गांधी से प्रेरणा लेते हैं। नेल्सन मंडेला से लेकर मार्टिन लूथर किंग जूनियर तक, अनेक वैश्विक नेताओं ने गांधी को अपना पथप्रदर्शक माना।

गांधी की महानता का एक और पक्ष उनका मानवीय दृष्टिकोण है। वे अंतिम व्यक्ति की चिंता करते थे—“अंत्योदय” का सिद्धांत। आज जब विकास की परिभाषा पर प्रश्नचिह्न लगे हुए हैं, गांधी का यह विचार कि समाज की प्रगति का मूल्यांकन सबसे कमजोर व्यक्ति की स्थिति से होना चाहिए, विश्व के लिए एक नैतिक कसौटी बन गया है। असमानता, गरीबी और सामाजिक बहिष्कार के विरुद्ध संघर्ष में गांधी की सोच आज भी उतनी ही प्रखर है।
30 जनवरी को गांधी को स्मरण करना केवल श्रद्धांजलि अर्पित करना नहीं है, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लेना है। उनकी शहादत हमें यह सिखाती है कि सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन वही स्थायी और सार्थक होता है। समय बीतने के साथ गांधी एक ऐतिहासिक व्यक्ति से बढ़कर एक नैतिक चेतना बन चुके हैं—ऐसी चेतना जो सीमाओं, राष्ट्रों और संस्कृतियों से परे है।

निस्संदेह, महात्मा गांधी की महानता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। वे आज भी दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि हिंसा के अंधकार में अहिंसा का दीपक ही मानवता को सही दिशा दे सकता है। यही कारण है कि गांधी आज भी जीवित हैं—अपने विचारों में, अपने आदर्शों में और विश्व की अंतरात्मा में, एक सच्चे वैश्विक संत के रूप में।

(लेखक आचार्य, राजनीति विज्ञान,उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार में कार्यरत हैं)

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