मां गंगा से सत्ता तक, अस्पताल से श्मशान तक, मां गंगा ने किसे बुलाया?

जुबिली न्यूज डेस्क

पूरे देश में कोरोना कहर बरपा रहा है। न तो संक्रमित होने का सिलसिला थमता नजर आ रहा है और न ही मौतों का। हर दिन कहीं कोई ऑक्सीजन की कमी से मर रहा है तो कहीं बीमारी से। अब तो गांवों में भी कोरोना तांडव मचाए हुए है।

कोरोना संकट में जो अव्यवस्था और लूट मची है उसके लिए मोदी सरकार की खूब आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग का गुस्सा दिख रहा है।

सोशल मीडिया पर ही वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी भी मोदी सरकार पर भड़कते नजर आए। ट्विटर पर उन्होंने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा- ‘मां गंगा से सत्ता तक, घर से सड़क, सड़क से अस्पताल, अस्पताल से शमशान, शमशान से गंगा तक, मां गंगा ने किसे बुलाया?’

वरिष्ठ पत्रकार ने कई ट्वीट किए। अपने अगले ट्वीट में उन्होंने कहा- ‘2014 देश की मासूमियत छीन ली…’। बाजपेयी ने एक और पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा- जब 1989 की फाइल खुल सकती है, तब 1984, 2002, 2005, 2013, 2014 की फाइल क्यों नहीं खुल सकती?

वरिष्ठ पत्रकार के पोस्ट पर यूजर्स की कंमेट की झड़ी लगा दी। यूजर आशीष पांडे ने लिखा- पुण्य प्रसून बाजपेयी जी अगर अब बोलने से समय मिल गया हो तो थोड़ा सकारात्मकता भी फैलाइए।

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पंकज मिश्रा नाम के यूजर ने लिखा-सारी नाकामयाबियों का ठीकरा फोडऩे के लिए एक ही सिर है। बाकी केजरीवाल, कैप्टन गहलोत बघेल, उद्धव, ममताज्..आदि महानुभाव लोग अपना प्रचार और सहखर्ची न करके अस्पताल बना सकते थे? सभी राज्यों के अपने अपने फंड और आय के स्रोत हैं। वह पैसा भी जनता का ही है, उसे ही जनता के लिए खर्च कर देते।

वहीं रवीश नाम के एक यूजर ने लिखा- जो बुलाने का ढोंग कर रहा था वो तो गया नहीं, मगर देश की निर्दोष जनता को भेज दिया।

दूसरे यूजर आरएफ हन्फी ने लिखा- वाराणसी की जनता अपने सांसद को ढूंढ रही है! मां गंगे याद नहीं आ रही है, प्रधान सेवक को!

सैयद नाम के शख्स ने कहा- sir, हमारे बिहार के पप्पू यादव जो गरीबों के मदगार हैं, करोना उलंघन का झूठा केस डाल कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। क्योंकि BJP सांसद की Ambulance पकड़वाने का जुर्म किया उन्होंने। जिसमें रेत ढुलाई की जाती थी, GOV इतनी बेशर्म है।

वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा- देश डूब रहा है, आरएसएस कहां है? भुपेंद्र नाम के शख्स ने इन्हें जवाब दे कहा- अंधों को दिखाई नहीं देता। आरएसएस अपना काम कर रहा है।

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