‘गांधी’ के चक्रव्यूह में फंसे राहुल  

न्यूज़ डेस्क 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में दो संसदीय क्षेत्र से पार्टी की कमान संभालेंगे। उत्तर में अमेठी के साथ दक्षिण में केरल के वायनाड से चुनाव लड़ रहे राहुल पर कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने का दबाव है। यहां पर तीसरे चरण में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी है।

अमेठी और वायनाड 

अमेठी और वायनाड दोनों ही कांग्रेस की सुरक्षित सीट है, लेकिन अमेठी में बीजेपी की उम्‍मीदवार स्‍मृति ईरानी के रूप में उन्‍हें पहले से कड़ी टक्‍कर मिल रही है, तो वहीं वायनाड में राहुल के सामने ‘गांधी’ के चक्रव्‍यूह को भेदने की चुनौती होगी।

वायनाड पर चार गांधी 

दरअसल, वायनाड लोकसभा सीट के लिए राहुल गांधी के नामांकन करने के बाद तीन ऐसे उम्‍मीदवारों ने अपना नामांकन किया है, जिनका सरनेम गांधी है। केरल के कोट्टयम के राहुल गांधी केई. ने भी वायनाड से नामांकन दाखिल किया है। इसके अलावा तमिलनाडु के राहुल जैसे नाम वाले राघुल गांधी के. भी वायनाड से चुनावी मैदान में हैं।

राहुल गांधी केई.

राहुल गांधी केई. के वायनाड सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। इनके छोटे भाई का नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर है और वे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े समर्थक हैं। केई. के पिता कुंजुमन कांग्रेस के बड़े समर्थक थे। इसी लिए गांधी परिवार से प्रभावित होकर उन्होंने अपने बेटों का नाम राहुल और राजीव रखा।

राघुल गांधी के.

राघुल गांधी के. तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले है और अगिला इंडिया मक्कल कझगम पार्टी की तरफ से उम्मीदवार हैं। राघुल के पिता कृष्णन बी स्थानीय कांग्रेस नेता थे। इसलिए उन्होंने बेटे का नाम राघुल गांधी और बेटी का नाम इंदिरा प्रियदर्शनी रखा। राघुल इससे पहले भी दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। 2014 में उन्होंने कोयंबटूर के निकाय चुनाव लड़े थे। इसके बाद 2016 में उन्होंने तमिलनाडु की सिंगनल्लूर से विधानसभा चुनाव लड़ा था।

केएम शिवप्रसाद गांधी

थ्रिसुर के एक स्कूल में संस्कृत के अध्यापक केएम शिवप्रसाद गांधी भी इस बार वायनाड से चुनावी मैदान में हैं। शिवप्रसाद के मुताबिक, उनके पिता केके मुकुंदन कांग्रेस कार्यकर्ता थे। लेकिन गांधी नाम उन्हें पिता की वजह से नहीं मिला। यह उन्होंने खुद इंडियन गांधियन पार्टी ज्वाइन करने के बाद नाम के आगे जोड़ लिया। शिवप्रसाद का कहना है कि वह पिछले 10 सालों से अपना विजन बताने के लिए मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कभी मिलने का मौका नहीं मिला।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पहली बार ईवीएम में उम्मीदवार की फोटो भी लगाना शुरू किया है। चुनावों में एक जैसे नामों की वजह से कई बार मतदाताओं में उम्मीदवारों को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में नाम की वजह से कम परिचित उम्मीदवार के वोट काटने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में राहुल गांधी को वायनाड में लेफ्ट और एनडीए उम्‍मीदवारों के अलावा ‘गांधी’ का चक्रव्‍यूह भी बड़ी चुनौती होंगे।

 

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