मिला टाटा का साथ तो जागी नई उम्मीदें

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली। मशहूर उद्योगपति रतन टाटा ने ऐसी कंपनी में निवेश किया जो केवल दो साल पुरानी है और इसके फाउंडर केवल 18 साल के हैं। टाटा ने अर्जुन देशपांडे के स्टार्टअप ‘जेनरिक आधार’ में निवेश किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने इसमें 50 फीसदी हिस्सा खरीदा है। यह डील कितने में हुई है, उसको लेकर भी फिलहाल किसी तरह की जानकारी नहीं है।

‘जेनरिक आधार’ मुख्य रूप से दवा का खुदरा कारोबार करती है। वह मैन्युफैक्चरर्स से दवा लाती है और रिटेलर्स को बेचती है। वर्तमान में इस कंपनी का रेवेन्यू करीब 6 करोड़ रुपए हैं और अगले तीन सालों में इसे 150-200 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

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सूत्रों के अनुसार, रतन टाटा ने यह निवेश व्यक्तिगत स्तर पर किया है और इसका टाटा समूह से लेना-देना नहीं है। इसके पहले भी रतन टाटा ओला, पेटीएम, स्नैपडील, क्योरफिट, अरबन लैडर, लेंसकार्ट और लाइबरेट जैसे कई स्टार्टअप में निवेश कर चुके हैं।

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देशपांडे ने इस सौदे की पुष्टि की है लेकिन उन्होंने यह बताने से इंकार किया कि यह सौदा कितनी रकम में हुआ है। देशपांडे ने बताया कि बिजनेस टायकून रतन टाटा उनके पार्टनर बनना चाहते थे और कारोबार को चलाने के लिए उनके मेंटोर भी।

अर्जुन देशपांडे के मुताबिक, ‘सर रतन टाटा ने दो दिन पहले ही जेनरिक आधार में 50 फीसदी हिस्सेदारी ली है, इस बारे में औपचारिक घोषणा जल्दी ही की जाएगी।’

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कंपनी का कहना है कि आने वाले दिनों में वह गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, नई दिल्ली, गोवा और राजस्थान जैसे राज्यों में 1000 फार्मेसी के साथ पार्टनरशिप करेगी और सस्ती दवा बेचेगी। जेनरिक आधार अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर को तकनीक के जरिए मदद करेगी। कंपनी में 55 कर्मचारी हैं जिसमें फार्मासिस्ट, आईटी इंजीनियर और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स हैं।

अर्जुन देशपांडे का कहना है कि उनका यूनिक बिजनेस मॉडल बाजार में मौजूद सभी कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित होगा और हमारा लक्ष्य लाखों परिवारों को सस्ती हेल्थकेयर उपलब्ध कराना है। हमारा मिशन बुजुर्गों और पेंशनभोगियों को जरूरत की दवाई कम से कम कीमत में उपलब्ध करना है।

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