3 दिन पहले RJD से दिया था इस्तीफा, आज दुनिया को कहा अलविदा

जुबिली न्‍यूज डेस्‍क

पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह का दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान में निधन हो गया। रघुवंश प्रसाद सिंह एम्स के आइसीयू वार्ड में भर्ती थे। सांस लेने में परेशानी होने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। दो दिन पहले उनकी हालत बिगड़ गई थी।

कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उनका पटना के एम्स में इलाज किया गया था। कुछ ठीक होने के बाद उन्हें पोस्ट कोविड मर्ज के इलाज के लिए दिल्ली एम्स ले जाया गया था। अभी तीन दिन पहले ही उन्होंने राजद की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था।

तबीयत खराब होने के बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। उनके निधन पर सियासी गलियारे में शोक की लहर है। इसके पहले आइसीयू से ही उन्‍होंने राष्‍ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से इस्‍तीफा देने का अपना पत्र जारी किया था।

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रघुवंश प्रसाद सिंह ने निधन पर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने गहर दुख जताया है। लालू प्रसाद यादव ने ट्वीट किया, ‘प्रिय रघुवंश बाबू! ये आपने क्या किया? मैनें परसों ही आपसे कहा था आप कहीं नहीं जा रहे है। लेकिन आप इतनी दूर चले गए। नि:शब्द हूं। दुःखी हूं। बहुत याद आएंगे।’

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन पर दुख व्‍यक्‍त किया है। उन्‍होंने ट्वीटर पर लिखा है श्री रघुवंश प्रसाद सिंह जी बिहार के उन क़द्दावर नेताओं में गिने जाते थे जिन्होंने समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। वे एक प्रबुद्ध एवं संवेदनशील व्यक्ति थे। उनके निधन का मुझे दुःख है।उनके परिवार एवं समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनायें।ओम् शांति!

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बता दें कि रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफा देने से बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आरजेडी को झटका लगा था। रघुवंश प्रसाद सिंह पिछले 32 वर्षों से लालू प्रसाद यादव के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने दिल्ली एम्स के आईसीयू से अपना इस्तीफा रांची रिम्स में अपना इलाज करा रहे लालू प्रसाद यादव को भेजा था।

74 वर्षीय रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपना राजनीतिक सफर जेपी आंदोलन में शुरू किया। रघुवंश प्रसाद सिंह साल 1977 से लगातार सियासत में रहे। वे लालू प्रसाद यादव के करीबी व उनके संकटमोचक माने जाते रहे। पार्टी में उन्‍हें दूसरा लालू भी माना जाता था। वे लगातार चार बार वैशाली से सांसद रहे। यूपीए की सरकार में मंत्री भी रहे। विपक्ष में रहते हुए वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को घेरने में सबसे आगे रहे।

मैथ्‍स के प्रोफेसर रहे रघुवंश प्रसाद सिंह राजनीति में सादगी से रहते हैं। एक बार मंत्री के रूप में वह दिल्ली के कनॉट प्लेस में चले गये थे जहां दुकानदार उन्हें पहचान पाया था और एक सामान के लिए अधिक कीमत ले ली थी।

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