रोजगार देने में फिसड्डी रही मोदी सरकार

न्यूज़ डेस्क

देश में आर्थिक मंडी झेल रही मोदी सरकार के सामने एक और नई मुसीबत आ गई है। पिछले तीन सालों में देश की बेरोजगारी की दर अपने उच्चतम स्तर पर है। ऐसा सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है। यही नहीं ये रिपोर्ट ये भी बता रही कि लोग रोजगार की तलाश कर रहे हैं कि लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही हैं।

जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, इस साल में अगस्‍त तक बेरोजगारी की दर 8.4 फीसदी रही, जो पिछले तीन साल के उच्‍चतम स्‍तर पर है। इससे पहले बेरोजगारी के इस आंकड़े ने सितंबर 2016 को छुआ था। अगस्‍त की साप्‍ताहिक बेरोजगारी दर के आंकड़े के अनुसार, बेरोजगारी की दर महीने के हर हफ्ते में आठ से नौ फीसदी के बीच रही है।

शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में ये रहीं दरें

इससे पहले जुलाई महीने में साप्‍ताहिक बेरोजगारी दर सात से आठ प्रतिशत रही थी। इन आकड़ों के हिसाब से अगस्‍त महीने में हर हफ्ते बेरोजगारी की दर एक फीसदी तक बढ़ी है। इसमें शहरी बेरोजगारी की दर अगस्‍त महीने में 9.6 फीसदी जबकि ग्रामीण इलाकों में ये आंकड़े 7.8 फीसदी पर पहुंच गए। लेकिन खास बात ये है कि अगस्त 2019 में ग्रामीण इलाके की साल-दर-साल रोजगार में 2.9 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है जबकि शहरी इलाके में इस पर 0.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है

श्रम भागीदारी दर दर्ज की गई मामूली बढ़त

इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया कि अगस्‍त में श्रम भागीदारी दर में मामूली बढ़त दर्ज की गई। यह दर 43.35 फीसदी रही है जो अक्‍टूबर 2018 में 42.46 फीसदी पर थी। रिपोर्ट में कहा गया कि नोटबंदी और जीएसटी के झटके से उबरने की वजह से श्रम भागीदारी दर बढ़ रही है लेकिन यह रोजगार दर के आंकड़ों से नहीं मिलती है। बेरोजगारी के ये आकड़े सरकार के लिए खतरे की घंटी है।

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