इलेक्शन कमीशन की चेतावनी, ‘सेना को मत घसीटो चुनाव में’

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को इलेक्शन कैंपेन में सुरक्षाबलों की तस्वीरों का इस्तेमाल न करने की हिदायत दी है। इसके लिए आयोग ने सभी दलों को  एक नोटिस जारी किया है। आयोग ने पार्टियों से कहा है कि वे सुरक्षाबलों का इस्तेमाल किसी भी तरह के प्रचार-प्रसार में न करें।

सैनिकों के सियासी इस्‍तेमाल पर EC की नोटिस

नोटिस में कहा गया,

‘कमीशन का मानना है कि सेनाध्यक्ष या किसी भी सुरक्षाबल की फोटो, किसी सुरक्षा कार्यक्रम की फोटो को किसी भी तरह के प्रचार,प्रोपोगेंडा या कैंपेन में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कमीशन सभी राजनीतिक पार्टियों को सलाह देता है कि वे अपने कैंडिडेट्स के कैंपेन या प्रोपगेंडा में सुरक्षाबलों की फोटो के इस्तेमाल पर रोक लगाएं’

2013 में भी रक्षा मंत्रालय ने की थी शिकायत

आयोग ने 2013 में जारी परामर्श का हवाला देते हुए सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों से अपने पार्टी प्रतिनिधियों और उम्मीदवारों से इसका सख़्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा। उल्लेखनीय है कि आयोग ने दिसंबर 2013 में रक्षा मंत्रालय की शिकायत पर यह परामर्श जारी किया था। इसमें मंत्रालय ने विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों द्वारा चुनाव अभियान में सैन्यकर्मियों की तस्वीर का इस्तेमाल करने पर चुनाव आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए इसे रोकने के लिए उपयुक्त निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था।

आयोग ने अपने परामर्श में कहा कि सुरक्षा बल देश की सीमाओ और राजनीतिक तंत्र की सुरक्षा के तटस्थ पहरेदार हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को अपने चुनावी अभियान में सैन्य बलों के संदर्भ का किसी भी रूप में सहारा लेते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत है।

इसके मद्देनज़र राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों को चुनाव अभियान में सैन्य बलों के जवानो और सैन्य अभियानों की तस्वीर आदि का इस्तेमाल बिलकुल नहीं करना चाहिए. आयोग ने राजनीतिक दलों के प्रमुखों से अपने नेताओं एवं उम्मीदवारों को सैनिकों और सैन्य अभियानों की तस्वीर का इस्तेमाल करने से बचने का निर्देश जारी करने को कहा है।

बताते चले कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद से कई राजनीतिक दलों के मंच पर शहीद जवानों के फोटो लगाए गए थे। इसके बाद वायु सेना के पायलट अभिनंदन की फोटो का इस्तेमाल भी चुनावी पोस्टरों और सोशल मीडिया कैंपेन में हो रहा है। ऐसे प्रचार पर कुछ दलों ने आपत्ति भी जताई थी और आयोग से इसकी शिकायत करने की बात भी कही थी।

चुनाव विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने ट्वीट करते हुए चुनाव आयोग को टैग किया और पूछा है कि इस पोस्टर विज्ञापन पर क्या कार्रवाई होगी। इसपर चुनाव आयोग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद ऐसे विज्ञापनों पर गौर किया जाएगा।

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