JNU हिंसा की आखिर क्या है वजह, सर्वर रूम से था संबंध !

स्पेशल डेस्क

नई दिल्ली। दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार को जमकर हिंसा हुई है। इतना ही नहीं हमले में छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत दर्जनभर से ज्यादा लोग घायल हुए हैं लेकिन इस हिंसा के पीछे कौन लोग है इसको लेकर बहस देखने को मिल रही है।

जानकारी के मुताबिक करीब 7 बजे कैंपस में चेहरे पर नकाब बांधे कुछ लोगों ने जेएनयू कैंपस के अंदर छात्रों और शिक्षकों पर हमला कर दिया। इस दौरान लोगों ने कारों को भी निशाना बनाया और हॉस्टल में भी तोडफ़ोड़ की।

जेएनयू में हुई हिंसा के बीच एक चीज का नाम तेजी से सामने आ रहा है। दरअसल इस हिंसा को सर्वर रूम से भी जोड़ा जा रहा है। सर्वर रूम में ऐसी क्या चीज थी जिसकी वजह से इतनी बड़ी हिंसा वहां से शुरू हुई।

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जानकारी के मुताबिक सर्वर रूम को लेकर सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जेएनयू प्रशासन ने छात्रों के परीक्षा से बहिष्कार और प्रदर्शनों के बावजूद एडमिशन प्रक्रिया जारी रखी थी। इसके बाद छात्रसंघ ने इसका कड़ा विरोध किया था और सर्वर रूम में जा पहुंचे और वहीं से सारा मामला बिगड़ गया था।

बता दें कि एडमिशन प्रक्रिया ऑनलाइन जारी थी जिसका सीधा संबंध सर्वर रूम से होता है। जेएनयू प्रशासन ने इस बारे में कहा है और सर्वर रूम का जिक्र भी किया है। उनके अनुसार कुछ छात्रों ने मास्क पहनकर सर्वर रूम पर कब्जा कर लिया था और टेक्नीकल स्टाफ को भी बंधक बना लिया था। इस बात को लेकर एबीवीपी और लेफ्ट विंग के स्टूडेंट्स में मारपीट हो गई।

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जेएनयू एबीवीपी के अध्यक्ष दुर्गेश कुमार ने इस बारे कहा था कि पिछले 3 दिनों से लेफ्ट यूनियन के छात्रों ने इंटरनेट बंद करवा दिया था। इससे छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराने काफी बाधा आ रही थी। जेएनयू मामले में दिल्ली पुलिस ने दंगा करने और पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा दर्ज किया है। यह मुकदमा दिल्ली पुलिस की तरफ से दर्ज कराया गया है।

जेएनयू प्रशासन ने कल हुए दंगे को लेकर अभी तक पुलिस प्रशासन को कोई शिकायत मुकदमा दर्ज करने के लिए नहीं दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है कि अंदर कैंपस में जो लोग आए थे वह अंदर के लोग ही थे या बाहर के फिलहाल एक मुकदमा दर्ज हुआ है।

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