जुबिली न्यूज डेस्क
प्रयागराज। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद और गहराता जा रहा है। मेला प्राधिकरण की ओर से एक और नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मेला क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगाई जा सकती है। इसी बीच इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी एंट्री हो गई है।

बिना किसी का नाम लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखा संदेश देते हुए कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए व्यक्तिगत संपत्ति जैसी कोई चीज नहीं होती।सीएम योगी ने कहा,“एक योगी, एक संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी भी कुछ नहीं होती, धर्म ही उसकी असली प्रॉपर्टी होती है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है।”
“बहुत से कालनेमि हैं, सतर्क रहना होगा”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कुछ लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “अब कोई धर्म के खिलाफ आचरण करता है तो ऐसे बहुत से कालनेमि होंगे। हमें ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा।”
नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब
इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मेला प्राधिकरण की ओर से भेजे गए दूसरे नोटिस का लिखित जवाब दे दिया है। अपने जवाब में उन्होंने कहा कि पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, जो आदि शंकराचार्य के समय से भी लगभग 2500 वर्ष पुरानी परंपरा है। उन्होंने अधिकारियों पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाया।
पुलिस पर गंभीर आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि उनके अनुयायियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें अपमानित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पालकी को घसीटा और अपराधियों जैसा व्यवहार किया। साथ ही परेड कराकर सार्वजनिक रूप से उपहास उड़ाने का भी आरोप लगाया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पालकी को जानबूझकर खतरनाक स्थान की ओर ले जाया गया और नदी में गिराने की कोशिश की गई, जिसे उन्होंने हत्या के प्रयास के बराबर बताया। उन्होंने कहा,“यह हमारी धार्मिक भावना पर सीधा हमला है।”
“सरकार के पास बस बुलडोजर ही है”
मेले में शिविर हटाए जाने की चेतावनी पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखा तंज कसते हुए कहा,
“इस सरकार के पास एक बुलडोजर ही तो है। चला दे हमारे शिविर पर। हम तो वैसे भी फुटपाथ पर बैठे हैं, वहीं से देख लेंगे।”
भूमि आवंटन रद्द करने और भविष्य में मेले में प्रवेश पर प्रतिबंध की चेतावनी को लेकर उन्होंने कहा कि अब यह देखा जाएगा कि प्रशासन किस हद तक जाता है। उन्होंने दावा किया कि नोटिस उन्हें चस्पा करने की बात कही जा रही है, लेकिन फिर भी उन्होंने उसका जवाब दे दिया है।
संतों के बयानों पर पलटवार
कुछ संतों की ओर से उनके खिलाफ दिए गए बयानों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “वे सब सरकार और बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। उन्हें जैसा निर्देश मिलता है, वैसा ही बोलते हैं।”
माघ मेले में यह विवाद अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक टकराव का रूप लेता नजर आ रहा है। अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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