दिवाली के बाद छठ महापर्व की तैयारियां तेज, जानिए खरना का अर्थ और महत्व

जुबिली स्पेशल डेस्क

दिवाली के समापन के साथ ही अब पूरे देश में छठ महापर्व की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं।
चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व नहाय-खाय से आरंभ होता है और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होता है।

यह पावन पर्व भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना को समर्पित है।छठ पूजा का उद्देश्य संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफलता की कामना से जुड़ा है।

इन चार दिनों में सबसे विशेष माना जाता है खरना, जो छठ पूजा का दूसरा दिन होता है।इस दिन व्रती महिलाएं पूरे नियम और शुद्धता के साथ पूजा करती हैं।आइए जानते हैं खरना के दिन पूजा की विधि क्या है और इसका धार्मिक महत्व इतना विशेष क्यों माना जाता है।

सूर्य उपासना का पावन पर्व छठ पूजा इस साल 25 अक्टूबर 2025 (शनिवार) से शुरू होकर 28 अक्टूबर (मंगलवार) तक चलेगा। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक हर दिन का अपना धार्मिक महत्व है।

छठ पूजा का पूरा कार्यक्रम 

  • 25 अक्टूबर: नहाय-खाय  पवित्र स्नान कर शुद्ध आहार से व्रत की शुरुआत।
  • 26 अक्टूबर: खरना गुड़, चावल और दूध से बनी खीर का भोग लगाकर 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ।
  • 27 अक्टूबर: संध्या अर्घ्य   डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया की आराधना।
  • 28 अक्टूबर: उषा अर्घ्य  उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन।

कैसे की जाती है पूजा?

खरना के दिन व्रती महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़, चावल और दूध की खीर बनाती हैं। इसके साथ आटे की रोटी, पूड़ी और ठेकुआ तैयार किया जाता है। यह प्रसाद छठी मैया को अर्पित करने के बाद ही व्रती ग्रहण करती हैं, जिसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।

खरना का महत्व

छठ पर्व का दूसरा दिन यानी खरना पवित्रता और भक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन छठी मैया घर में प्रवेश करती हैं। व्रती इस दिन पूरी स्वच्छता और संयम के साथ पूजा करती हैं ताकि व्रत में कोई बाधा न आए।
विश्वास है कि खरना की भक्ति से छठी मैया और भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है, और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. JUBILEE POST इसकी पुष्टि नहीं करता है)

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