मालदा हिंसा की घटना ने गर्म कर दिया बंगाल का माहौल

जुबिली न्यूज डेस्क
पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 अप्रैल को हुई हिंसक घटना ने राज्य की राजनीति को हिला दिया है । एक गांव में उग्र भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों—जिनमें तीन महिलाएं शामिल थीं—को कई घंटों तक बंधक बना लिया। चुनाव से ठीक पहले हुई यह घटना पूरे राज्य को स्तब्ध कर गई और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
यह केवल हिंसा का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक कमजोरी और चुनावी प्रक्रिया में बढ़ते तनाव का संकेत है। विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से जुड़ा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश भड़क गया।
घटना का विवरण: विरोध से बंधक बनाना
न्यायिक अधिकारी SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गांव पहुंचे थे। तभी ग्रामीणों का समूह इकट्ठा हो गया और नाम हटाने का विरोध करने लगा। हालात बेकाबू हो गए—भीड़ ने अधिकारियों को घेर लिया, उन्हें घंटों बाहर नहीं निकलने दिया और भोजन-पानी जैसी सुविधाओं से वंचित रखा। यह घटना जमीनी स्तर पर चुनावी तनाव और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।
BJP का प्रहार: ‘कानून-व्यवस्था ध्वस्त’
बीजेपी ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि ममता बनर्जी की ‘उकसावे वाली राजनीति’ इसका कारण है। उन्होंने चुनाव आयोग से जांच की मांग की—क्या हटाए गए नाम असली नागरिकों के थे? स्मृति ईरानी ने टीएमसी को ‘भ्रष्टाचार और हिंसा’ की पार्टी बताया, जबकि रवि किशन ने प्रचार के दौरान BJP कार्यकर्ताओं पर हमलों का जिक्र किया। रेखा शर्मा और गौरव भाटिया ने तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया।
TMC का जवाब: ‘बीजेपी की साजिश’
टीएमसी ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी चुनाव बाधित कर बंगाल पर कब्जा करना चाहती है। पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग के जरिए बाहरी अधिकारियों को थोपकर हस्तक्षेप हो रहा है। सांसद कुणाल घोष ने SIR से उपजे असंतोष को बीजेपी का हथियार बताया।
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे ‘न्यायिक प्रक्रिया में बाधा’ कहा। CJI सूर्यकांत की बेंच ने राज्य प्रशासन पर सवाल उठाए—पूर्व सूचना के बावजूद सुरक्षा क्यों नाकाफी? मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP को नोटिस जारी हुए। कोर्ट के निर्देश:
- न्यायिक अधिकारियों के लिए केंद्रीय बल तैनात करें।
- SIR के दौरान सुरक्षा कड़ी करें।
- अधिकारियों व परिवारों की सुरक्षा का आकलन करें।
- अगली सुनवाई में वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हाजिर हों।
चुनावी हिंसा का खतरा
294 सीटों पर 23-29 अप्रैल को मतदान और 4 मई को गिनती होगी। 2021 में टीएमसी की 213 सीटों की जीत के बीच हिंसा के आरोप लगे थे। मालदा घटना लोकतंत्र की परीक्षा है—क्या बंगाल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कर पाएगा?
यह घटना प्रशासनिक निष्पक्षता, सुरक्षा और लोकतांत्रिक विश्वास पर बड़ा सवाल खड़ी करती है



