ईरान जंग में अमेरिका को बड़ा रणनीतिक नुकसान! चीन अंतरिक्ष से देख रहा हर सैन्य कदम

जुबिली स्पेशल डेस्क

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच United States को एक ऐसा रणनीतिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिसका असर लंबे समय तक दिख सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस युद्ध ने China को वह अवसर दे दिया है, जो उसे Russia–Ukraine War के दौरान भी नहीं मिला था। अब चीन की नजरें केवल जमीन पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर टिकी हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए अमेरिकी सेना की गतिविधियों, युद्धपोतों की तैनाती और हथियार प्रणालियों की कार्यप्रणाली का लगातार अध्ययन कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस निगरानी से चीन अमेरिकी सैन्य रणनीति और ऑपरेशनल पैटर्न का एक बड़ा डेटाबेस तैयार कर रहा है, जो भविष्य के किसी भी बड़े वैश्विक टकराव में उसके लिए अहम साबित हो सकता है।

Jilin-1 सैटेलाइट नेटवर्क पर खास नजर

चीन फिलहाल कई सैटेलाइट नेटवर्क संचालित कर रहा है, जिनमें 300 से अधिक निगरानी उपग्रह शामिल बताए जाते हैं। इनमें सबसे चर्चित Jilin-1 सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन है, जो हाई-रिज़ॉल्यूशन और 4K अल्ट्रा एचडी वीडियो कैप्चर करने की क्षमता रखता है।

बताया जा रहा है कि इन सैटेलाइट्स के जरिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों की गतिविधियों, जहाजों की तैनाती और लॉजिस्टिक मूवमेंट पर करीब से नजर रखी जा रही है। यहां तक कि जहाजों के रिफ्यूलिंग पैटर्न और ऑपरेशन टाइमिंग जैसे बारीक पहलुओं को भी रिकॉर्ड किया जा रहा है।

अमेरिकी सैन्य सिस्टम का डेटा जुटा रहा चीन

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि चीन ने इस संघर्ष के दौरान क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक की हैं। इनमें जमीन पर मौजूद विमानों के मॉडल और उनकी संख्या जैसी जानकारी भी शामिल बताई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे गंभीर पहलू यह है कि चीन अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम के व्यवहार का भी अध्ययन कर रहा है। मिसाइलों के मार्ग, उनकी प्रतिक्रिया प्रणाली और री-प्रोग्रामिंग के समय जैसे डेटा को भी ट्रैक किया जा रहा है।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह जानकारी व्यवस्थित रूप से एकत्रित की जा रही है, तो यह भविष्य में अमेरिकी सामरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

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