भारत के रास्ते पर अमेरिका! इस सेक्टर में आएगा बड़ा बदलाव

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इस फैसले के तहत पेट्रोल और डीजल में बायोफ्यूल की मात्रा बढ़ाई जाएगी। यह पहल भारत की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की तरह ही है, जिसका उद्देश्य पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है।

क्या है नया नियम और क्या बदलेगा?

अमेरिकी पर्यावरण एजेंसी (EPA) ने नए नियम जारी किए हैं, जिनमें फ्यूल में बायोफ्यूल की मात्रा बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है। खास तौर पर बायोमास बेस्ड डीजल की ब्लेंडिंग में 60% से ज्यादा बढ़ोतरी की योजना है। यह डीजल सोयाबीन तेल, पशुओं की चर्बी और कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है। इसके अलावा 2026 और 2027 के लिए भी नए टारगेट तय किए गए हैं, जिससे साफ है कि आने वाले समय में बायोफ्यूल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा। यह फैसला अमेरिका की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है।

क्या बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

इस नीति का सबसे बड़ा फायदा किसानों को होगा। मक्का और सोयाबीन की मांग बढ़ने से उनकी आय में बड़ा इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक किसानों की कमाई में अरबों डॉलर की बढ़ोतरी संभव है।हालांकि तेल कंपनियों ने चिंता जताई है कि बायोफ्यूल मिलाने से उत्पादन लागत बढ़ेगी। अगर ऐसा होता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा।

E15 पेट्रोल पर बहस तेज

अमेरिका में E15 पेट्रोल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। E15 का मतलब है पेट्रोल में 15% इथेनॉल मिलाना, जबकि अभी E10 ज्यादा प्रचलित है। सरकार चाहती है कि E15 को सालभर बेचने की अनुमति दी जाए। लेकिन ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि सभी गाड़ियां E15 के लिए उपयुक्त नहीं हैं। खासकर पुरानी गाड़ियों में ज्यादा इथेनॉल इंजन और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी वजह से इस फैसले पर बहस जारी है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?

भारत में भी सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग को तेजी से बढ़ा रही है। कई जगहों पर E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल) उपलब्ध हो चुका है और इसे और विस्तार देने की योजना है।अमेरिका का यह कदम संकेत देता है कि दुनिया के बड़े देश अब क्लीन फ्यूल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका असर ऑटो इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा, जहां कंपनियों को अपनी गाड़ियों को नए फ्यूल के हिसाब से अपग्रेड करना होगा।

बायोफ्यूल को बढ़ावा देना पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके साथ लागत और तकनीकी चुनौतियां भी जुड़ी हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह नीति आम लोगों और ऑटो सेक्टर पर कितना असर डालती ह

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