जुबिली न्यूज डेस्क
नाभा (पटियाला)। आम आदमी पार्टी (आप) ने नाभा के पटियाला गेट पर मनरेगा योजना में किए जा रहे बदलावों के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों मनरेगा मजदूर सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मजदूरों ने रोजगार गारंटी योजना में किए जा रहे कथित गरीब विरोधी नीतिगत बदलावों पर अपना गुस्सा जाहिर किया।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आप विधायक गुरदेव सिंह देव मान ने कहा कि केंद्र सरकार अगर चाहे तो मनरेगा का नाम बदल सकती है, लेकिन इसकी नीति और मंशा में किया गया बदलाव स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मनरेगा की “आत्मा” ही बदल दी है। नई नीतियों का उद्देश्य गरीबों को कुचलना, उनकी रोजी-रोटी छीनना और उन्हें और ज्यादा गरीबी में धकेलना है।
देव मान ने कहा कि यह देश मजदूरों की मेहनत से बना है—सड़कों और खेतों से लेकर ऊंची इमारतों तक, सुई से लेकर जहाज तक। लेकिन आज उन्हीं मजदूरों पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक गरीबों के वोट लेकर सत्ता में आने वाली सरकारें अब उन्हीं गरीबों को सजा दे रही हैं।
उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा मनरेगा के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और मजदूरों के हक में एकजुट होकर आवाज उठाने के लिए आभार जताया। देव मान ने कहा कि मुख्यमंत्री की अगुवाई में पंजाब विधानसभा ने केंद्र से मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने और गरीब विरोधी बदलावों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, अमन अरोड़ा सहित पूरी आम आदमी पार्टी मनरेगा मजदूरों के साथ मजबूती से खड़ी है।
प्रदर्शन के दौरान आप नेता अमरीक सिंह बांगड़ भी मौजूद रहे। उन्होंने मजदूरों से एकजुट रहने की अपील की और केंद्र की नीतियों की कड़ी निंदा की। वहीं, आप एससी विंग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी ने कहा कि पार्टी मनरेगा के बचाव में पूरे प्रदेश में प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले जालंधर, फिर नाभा में प्रदर्शन हुआ है और यह आंदोलन आने वाले दिनों में पूरे पंजाब में और तेज किया जाएगा।
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गुरप्रीत सिंह जीपी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार किसानों, मजदूरों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले तीन कृषि कानून थोपे गए, फिर संविधान को कमजोर करने की कोशिशें हुईं और अब मनरेगा में बदलाव कर कामकाजी महिलाओं और गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा असर डाला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक केंद्र सरकार ये बदलाव वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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