जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली। जमीन के बदले नौकरी (लैंड फॉर जॉब) मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव समेत 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

अदालत ने माना कि मामले में आगे सुनवाई और ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अब अगली प्रक्रिया के तहत आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश किए जाएंगे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लालू यादव ने अपनी पत्नी और बच्चों के लिए अचल संपत्तियां जुटाईं और अन्य आरोपियों ने इस कथित षड्यंत्र में उनका साथ दिया।
इस मामले में कुल 103 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। इनमें से 52 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया है, जबकि 5 आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
सीबीआई के आरोप
सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। यह जमीन लालू यादव के परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर रजिस्टर्ड कराई गई।
एजेंसी ने इस मामले में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और बेटे तेजस्वी यादव समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
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हालांकि, सभी आरोपियों ने सीबीआई के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। अब अदालत में इस मामले का ट्रायल चलेगा, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने सबूत पेश करेंगे।
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