कांग्रेस क्यों चाहती है मायावती को भड़काना

के.पी. सिंह
उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए बने बसपा-सपा गठबंधन में कांग्रेस को भी शामिल किए जाने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। इनके बीच बसपा के गढ़ में शुमार बुंदेलखंड की जालौन –गरौठा-भोगनीपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी को उम्मीदवार बनाने की घोषणा करके अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
बृजलाल खाबरी किसी समय मायावती के सबसे खास सिपहसालार थे, आज मायावती उन्हे फूटी आंखें देखने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस ने खाबरी को उम्मीदवार बना कर मायावती को भड़काने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आखिर कांग्रेस क्यों चाहती है कि मायावती आहत हों यह एक जटिल सवाल है।
बसपा के लिए एतिहासिक महत्व का मामला
जालौन जिला बसपा के लिए एतिहासिक महत्व की जगह है। ध्यान रहे कि बसपा को पहली चुनावी सफलता जालौन जिले में ही मिली थी जब उसने जिले की कोंच विधानसभा सीट पर अपनी जीत का परचम लहरा कर खाता खोला था। बसपा के काशीराम युग में इसी जिले के रामाधीन पार्टी में नंबर 2 की हैसियत में गिने जाते थे जिनके यहां मायावती ने कई बार उरई प्रवास के समय उनके परिवार के साथ रोटियां बनवाने में हाथ बटाया था।
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काशीराम जब पहली बार इटावा से लोकसभा में पहुंचे थे तो इन्ही रामाधीन को उन्होंने अपना संसदीय प्रतिनिधि बनाया था और वे ही काशीराम के संसदीय क्षेत्र के सभी फैसले उनकी ओर से लेते थे । नतीजतन मायावती ने पार्टी में अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित करने का मौका आने पर रामाधीन को सबसे पहले राजनीतिक तौर पर ठिकाने लगाने की कोशिश की।
बृजलाल मायावती के शुभंकर
इस पृष्ठभूमि में मायावती की बड़ी लालसा थी कि रामाधीन इतने महारथी होते हुए भी जिस जालौन –गरौठा सीट को जीत कर काशीराम की झोली में नहीं डाल पाये थे उसे जितवा कर वे उन्हे नीचा दिखा सकें। इसके लिए उन्होंने रामाधीन की ही टोली के सबसे तेजतर्रार छात्र युवा नेता बृजलाल खाबरी को उनके खेमे से फोड़ कर उन पर दांव लगाया। बृजलाल उनके शुभंकर साबित हुए जिन्होने 1999 में इस सीट से सांसद निर्वाचित हो कर बहन जी की लालसा पूरी कर दी। इस सीट पर बसपा की यह अभी तक की इकलौती सफलता है।
खाबरी के बिहाफ पर बड़ी लकीर खींचने का इरादा
कुछ वर्ष पहले राहुल गांधी ने कहा था कि मायावती ने दलितों में नेता नहीं उभरने दिए इसलिए कांग्रेस ऐसा काम करेगी जिससे हर स्तर पर दलित नेता तैयार हो सकें। बृजलाल खाबरी को मायावती के समानांतर उभार कर दलित नेतृत्व में उनसे बड़ी लकीर खींचने का इरादा तो कहीं राहुल का नहीं है।

गठबंधन को नुकसान
गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस 1991 के लोक सभा चुनाव के बाद से इस सीट पर लगातार हाशिये पर खिसकती रही। इतनी पतली हालत के वाबजूद कांग्रेस ने अपनी पहली ही सूची में जालौन– गरौठा – भोगनीपुर सीट को शामिल कर लिया। बृजलाल खाबरी पार्टी की उम्मीद के मुताबिक अगर इस सीट पर पार्टी के लिए कोई गुल खिला पाते हैं तो भाजपा की बजाय बड़ा नुकसान बसपा – सपा गठबंधन का करेंगे , ऐसा राजनीति के जानकारों का मानना है।




