इलाहाबाद हाई कोर्ट का गन कल्चर पर सख्त रुख, यूपी सरकार से मांगा जवाब

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और हथियार लाइसेंस के दुरुपयोग पर बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है तथा इससे कानून का राज कमजोर होता है।
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, सभी जिलाधिकारियों, पुलिस कमिश्नरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) से इस मामले में विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने सवाल किया कि आपराधिक मामलों में शामिल लोगों को आखिर किस आधार पर हथियार लाइसेंस जारी किए गए।
हथियार लाइसेंस व्यवस्था पर कोर्ट की नाराजगी
यह टिप्पणी जय शंकर उर्फ बैरिस्टर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने की। अदालत ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में आर्म्स एक्ट और उससे जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
कोर्ट के अनुसार, हथियार लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और ट्रांसफर की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई है।
हलफनामे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 10,08,953 हथियार लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा 23,407 आवेदन लंबित हैं और 1,738 अपीलें कमिश्नरों के पास विचाराधीन हैं।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि 6,062 ऐसे लोगों को भी हथियार लाइसेंस दिए गए हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
इस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि ऐसे लोगों को लाइसेंस देने के पीछे क्या आधार था।
कोर्ट ने गन कल्चर को बताया खतरनाक
अदालत ने कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर गन कल्चर को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन सामाजिक सौहार्द बिगाड़ता है और आम लोगों में डर पैदा करता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हथियारों के दुरुपयोग पर सख्ती जरूरी है।
कई प्रभावशाली लोगों की जानकारी तलब
सुनवाई के दौरान अदालत ने कई प्रभावशाली राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तियों के मामलों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उनके हथियार लाइसेंस की समीक्षा क्यों नहीं की गई।
अदालत ने इन व्यक्तियों की सुरक्षा श्रेणी और तैनात पुलिसकर्मियों की जानकारी भी मांगी है।
26 मई को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने गृह विभाग, सभी DM, पुलिस कमिश्नर और SSP को आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से शपथ पत्र भी मांगा गया है कि अदालत से कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी, जहां सरकार और पुलिस प्रशासन को विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।



