Cockroach Janta Party vs BJP: इंस्टाग्राम पर ‘कॉकरोच’ के आगे बेअसर हुई BJP की सोशल मीडिया आर्मी, जानें इस डिजिटल बगावत की इनसाइड स्टोरी

जुबिली स्पेशल डेस्क
भारतीय राजनीति में चुनावी रैलियों और भारी-भरकम फंड के दम पर नैरेटिव सेट करने का दौर शायद अब पीछे छूट रहा है।
इंटरनेट की ताकत और ‘जेन-जी’ (Gen Z) यानी आज के युवाओं के आक्रोश ने मिलकर सोशल मीडिया के इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया है।
खुद को दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन कहने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की रेस में एक नवजात ‘सटायर’ (व्यंग्य) पेज ने धूल चटा दी है।
- महज कुछ दिन पहले शुरू हुए एक डिजिटल मूवमेंट ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का आंकड़ा 90 लाख (9 Million) को पार कर चुका है, जबकि सालों से एक्टिव बीजेपी का आधिकारिक हैंडल 87 लाख (8.7 Million) पर ही अटका है। यह सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि भारतीय डिजिटल स्पेस में एक बहुत बड़ी बगावत का संकेत है।
18,400 पोस्ट बनाम सिर्फ 55 पोस्ट: आंकड़ों की हैरान करने वाली कहानी
इस डिजिटल जंग की गहराई को समझने के लिए थोड़ा गणित समझना जरूरी है। बीजेपी ने अपनी सोशल मीडिया आर्मी, भारी बजट और सालों की मेहनत के बाद करीब 18,400 से अधिक पोस्ट शेयर करके 87 लाख फॉलोअर्स की फौज खड़ी की थी।
इसके उलट, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने महज 55 पोस्ट किए और बीजेपी को पछाड़ते हुए 90 लाख से आगे निकल गई। यह साफ दिखाता है कि इस पेज का कंटेंट युवाओं के दिलों को कितनी गहराई से छू गया।
अदालती टिप्पणी से लगी चिंगारी, जिसने इंटरनेट पर पैदा किया ‘दैत्य’
आखिर इस अजीबोगरीब नाम वाले आंदोलन की शुरुआत कहां से हुई? इसकी कहानी किसी बंद कमरे की प्लानिंग नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी अदालत से निकले गुस्से की है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं के संदर्भ में कथित रूप से इस्तेमाल किए गए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट्स’ (परजीवी) जैसे शब्दों ने इंटरनेट की दुनिया में बारूद का काम किया।
बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएट और 30 वर्षीय रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने इस आक्रोश को एक नया मोड़ दे दिया।
उनका कहना है कि जब देश का युवा पहले से ही बेरोजगारी और पेपर लीक से परेशान हो, और तब संविधान के रक्षक की तरफ से ऐसा ‘इंटरनेट अपमान’ आए, तो उसे बर्दाश्त करना मुश्किल था। देश के युवाओं ने इसी अपमान को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान बना लिया।
सटायर से संगठन: 4 दिन में 2 लाख युवाओं ने ली ‘शपथ’
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि यह कोई पेड या किसी विपक्षी दल द्वारा स्पॉन्सर्ड पीआर स्टंट नहीं है। युवाओं के भीतर सिस्टम, नौकरी की कमी और अपनी आवाज दबाए जाने को लेकर जो सालों का गुबार था, उसे बस एक रास्ता मिल गया।
हैरानी की बात यह है कि महज 4 दिनों के भीतर इस व्यंग्यात्मक वेबसाइट पर 2 लाख से ज्यादा युवाओं ने बाकायदा फॉर्म भरकर मेंबरशिप ले ली है। इस फॉर्म की शर्तें भी व्यवस्था पर करारा तंज हैं जैसे आवेदक का ‘क्रॉनिकली ऑनलाइन’ होना या बेरोजगार और आलसी होना।
हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव और NEET पेपर लीक पर सीधा प्रहार
ऊपरी तौर पर भले ही यह मोर्चा एक मीम या मजाक जैसा लगे, लेकिन इसके उठाए मुद्दे बेहद गंभीर और चुभने वाले हैं। वेबसाइट पर जारी इसके 5-सूत्रीय घोषणापत्र में कुछ बेहद क्रांतिकारी मांगें शामिल हैं:
- पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को रिटायरमेंट के तुरंत बाद राज्यसभा सीट या कोई सरकारी पद न दिया जाए।
- चुनाव में वैध वोट काटने वाले अधिकारियों पर सीधी कानूनी कार्रवाई हो।
- महिलाओं को संसद और कैबिनेट में 50 फीसदी आरक्षण मिले।
युवाओं का सीधा सवाल: आंदोलन से जुड़े युवाओं का कहना है कि पिछले 12 सालों से देश की राजनीति को सिर्फ ‘हिंदू-मुस्लिम’ के इर्द-गिर्द घुमाया जा रहा है, जबकि आज की पीढ़ी एआई (AI), सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और रोजगार जैसे भविष्य के विषयों पर बात करना चाहती है।
हाल ही में हुए नीट (NEET) पेपर लीक के कारण डिप्रेशन में आकर एक छात्र द्वारा की गई आत्महत्या का जिक्र करते हुए युवाओं ने सीधा सवाल दागा है— “इतनी बड़ी व्यवस्थागत विफलता के बाद भी देश के शिक्षा मंत्री अपने पद पर कैसे बने हुए हैं?”
क्या 2029 के आम चुनाव में उतरेगी ‘कॉकरोच पार्टी’?
इंस्टाग्राम पर देश की सत्ताधारी पार्टी को पछाड़ने के बाद अब राजनीतिक पंडितों के बीच यह कयासबाजी शुरू हो गई है कि क्या यह डिजिटल मोर्चा भविष्य में एक असली राजनीतिक दल का रूप लेगा? क्या ये लोग 2029 के लोकसभा चुनाव में उतरेंगे?
इस पर संगठन के कोर मेंबर्स का कहना है कि आंदोलन अभी अपने शुरुआती दौर में है। फिलहाल उनका पूरा ध्यान देश भर से पंजीकृत हो रहे लाखों युवाओं से संवाद स्थापित करने और उनके मुद्दों को उठाने पर है। वे जल्दबाजी में कोई चुनावी फैसला लेकर इस जमीनी गुस्से को राजनीतिक महत्वाकांक्षा की भेंट नहीं चढ़ाना चाहते।
नतीजा: चुनावी मैदान में जो भी हो, लेकिन डिजिटल दुनिया के कुरुक्षेत्र में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने यह साबित कर दिया है कि जब युवाओं के स्वाभिमान और भविष्य पर चोट होती है, तो वे बड़ी से बड़ी आईटी सेल (IT Cell) के घमंड को चार दिन में चकनाचूर कर सकते हैं।


