ईरान संघर्ष के बीच अब इस देश पर अमेरिकी नजर, ट्रंप ने दी कार्रवाई की चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अब ट्रंप प्रशासन की नजरें क्यूबा पर टिक गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि उनकी सरकार क्यूबा की हर गतिविधि पर करीबी नजर रख रही है और किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
इसी बीच अमेरिकी नौसेना का विशाल युद्धपोत USS Nimitz कैरेबियन सागर पहुंच गया है। अमेरिकी दक्षिणी कमान (Southcom) ने बुधवार 20 मई को इसकी आधिकारिक जानकारी दी। इस तैनाती के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
1996 विमान हमले मामले में राउल कास्त्रो पर गंभीर आरोप
अमेरिकी न्याय विभाग ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो समेत 5 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या और अमेरिकी नागरिकों की हत्या की साजिश रचने के आरोप में अभियोग सार्वजनिक किया है।
यह मामला साल 1996 में मानवीय सहायता संगठन Brothers to the Rescue के दो विमानों को क्यूबा की वायुसेना द्वारा मार गिराए जाने से जुड़ा है। इस घटना में 4 लोगों की मौत हुई थी।
मियामी कोर्ट में दाखिल हुआ अभियोग
मियामी की संघीय अदालत में दायर अभियोग के अनुसार, उस समय क्यूबा के रक्षा मंत्री रहे 94 वर्षीय राउल कास्त्रो पर सैन्य कार्रवाई की योजना बनाने और उसे मंजूरी देने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा था।
इस मामले की घोषणा मियामी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश और दक्षिणी फ्लोरिडा के अमेरिकी अटॉर्नी जेसन ए. रेडिंग क्विन्योनेस ने की।
फिदेल कास्त्रो ने ली थी जिम्मेदारी
घटना के बाद तत्कालीन क्यूबाई नेता फिदेल कास्त्रो ने विमानों को गिराने की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। उनका दावा था कि यह संगठन हवाना के ऊपर सरकार विरोधी पर्चे गिरा रहा था।
ब्रदर्स टू द रेस्क्यू संगठन समुद्र के रास्ते क्यूबा से भागने वाले लोगों की खोज और सहायता का काम करता था।
30 साल बाद तेज हुई न्याय की मांग
पिछले तीन दशकों से क्यूबा-अमेरिकी समुदाय और मृतकों के परिजन राउल कास्त्रो के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। संगठन के संस्थापक जोस बसुल्टो ने कहा कि “30 वर्षों तक न्याय में हुई देरी सबसे बड़ा अन्याय रही है।”
आर्थिक संकट और चीन-रूस कनेक्शन पर भी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब क्यूबा गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। हाल ही में जॉन रैटक्लिफ ने भी क्यूबा का दौरा किया था। वहां उन्होंने आर्थिक सुधारों और रूस-चीन की खुफिया गतिविधियों को लेकर क्यूबाई नेतृत्व से बातचीत की थी।



