मिडिल ईस्ट संकट के बीच UAE दौरे पर पीएम मोदी, तेल और LNG सप्लाई पर होगी अहम चर्चा

Narendra Modi आज संयुक्त अरब अमीरात यानी United Arab Emirates के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। ऐसे समय में यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है, जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट में समुद्री व्यापार और तेल सप्लाई को प्रभावित कर दिया है।

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के कारण वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है। भारत अपने कच्चे तेल का 85 प्रतिशत से ज्यादा आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी रूट से आता है। ऐसे में किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और चालू खाते पर पड़ सकता है।

दौरे के दौरान पीएम मोदी अबू धाबी में Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा।

बैठक में इन विषयों पर चर्चा संभव है:

  • कच्चे तेल की दीर्घकालिक सप्लाई
  • LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) समझौते
  • भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार
  • समुद्री मार्ग बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक सप्लाई व्यवस्था

भारत के पास फिलहाल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले तीन रणनीतिक तेल भंडार हैं। इसके अलावा 6.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले दो नए भंडार विकसित करने की योजना है।

मौजूदा स्टोरेज का एक हिस्सा पहले से Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) को लीज पर दिया जा चुका है। माना जा रहा है कि इस मॉडल का विस्तार नए समझौतों के जरिए किया जा सकता है।

रेजर कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर Abhinav Munshi का कहना है कि भारत इस दौरे में दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर देगा।

उनके मुताबिक:

  • भारत अधिक LNG सप्लाई चाहता है
  • तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने में UAE की भागीदारी अहम हो सकती है
  • शिपिंग बाधित होने पर लचीली सप्लाई शर्तों पर बातचीत संभव है

उन्होंने कहा कि OPEC से UAE के हालिया बाहर निकलने के बाद उसके पास उत्पादन बढ़ाने की ज्यादा क्षमता है, जिससे वह भारत के लिए भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बन सकता है।

भारत और United Arab Emirates के बीच जनवरी 2026 में 3 अरब डॉलर का LNG समझौता हुआ था। माना जा रहा है कि पीएम मोदी का यह दौरा उस साझेदारी को और मजबूत करेगा।

दोनों देशों ने 2022 में भारत-UAE CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद व्यापार में तेजी आई है।

United Arab Emirates भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

अभिनव मुंशी के मुताबिक:

  • 2025 में दोनों देशों के बीच माल व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है
  • UAE की कंपनियां भारत में 25 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश कर चुकी हैं
  • पिछले 5 वर्षों में अकेले 16 अरब डॉलर का निवेश हुआ है

संयुक्त अरब अमीरात में 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं। ये लोग विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं और भारत को सबसे ज्यादा रेमिटेंस भेजने वालों में शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी अस्थिरता का सीधा असर:

  • भारतीय परिवारों की आय पर
  • विदेशी मुद्रा प्रवाह पर
  • ऊर्जा कीमतों पर
  • और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

UAE अब भारत को LNG सप्लाई करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और UAE का रिश्ता अब सिर्फ खरीदार और सप्लायर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी में बदल चुका है।

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