ममता बनर्जी का ‘महागठबंधन’ आह्वान: भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के लिए ‘न्यायिक और राजनीतिक’ जंग का ऐलान

कोलकाता: रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने न केवल विपक्षी दलों, बल्कि सामाजिक संगठनों (NGOs) से भी इस ‘आंदोलन’ में शामिल होने की अपील की है।
1. जयंती मनाने पर ‘अघोषित प्रतिबंध’ का आरोप
ममता बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें कालीघाट मोड़, मुक्तदल और फायर ब्रिगेड स्टेशन जैसे प्रमुख स्थानों पर रवींद्र जयंती मनाने की अनुमति नहीं दी गई। इसे ‘तानाशाही’ बताते हुए उन्होंने पार्टी कार्यालय के बाहर ही उत्सव मनाया और कहा कि यह टीएमसी की आवाज दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है।
2. सुरक्षा हटाने और ‘गुंडागर्दी’ पर कड़ा प्रहार
ममता ने भाजपा पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा
- सुरक्षा में कटौती: उन्होंने याद दिलाया कि 2011 में सत्ता में आने पर उन्होंने पूर्व सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य को अपनी बुलेटप्रूफ कार और Z+ सुरक्षा दी थी, लेकिन भाजपा ने सत्ता संभालते ही उनकी सुरक्षा हटा ली।
- कार्यकर्ताओं पर अत्याचार: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा दलितों और महिलाओं को धमकाया जा रहा है, यहाँ तक कि एक 92 वर्षीय बुजुर्ग महिला को भी घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
3. ‘वकील’ ममता की न्यायिक चुनौती और राष्ट्रीय विपक्षी एकजुटता
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वह खुद एक वकील हैं और भाजपा के खिलाफ यह लड़ाई कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर लड़ेंगी। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते समर्थन का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी निम्नलिखित नेताओं से बातचीत हुई है:
- प्रमुख नेता: सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, उद्धव ठाकरे और तेजस्वी यादव।
- मुलाकात: अखिलेश यादव ने व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात की है।
- समर्थन: हेमंत सोरेन, अरविंद केजरीवाल, कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कानूनी और राजनीतिक दिग्गज भी इस लड़ाई में उनके साथ हैं।
4. महुआ मोइत्रा प्रकरण: ‘चुनावी धांधली’ के गंभीर आरोप
मता ने सांसद महुआ मोइत्रा के साथ कोलकाता हवाई अड्डे पर हुई कथित बदसलूकी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोइत्रा को परेशान करने वाले लोग ‘चुनाव में धांधली’ करने के इरादे से कोलकाता आए थे। उन्होंने दावा किया कि इस पूरी घटना के वीडियो सबूत उनके पास मौजूद हैं।
निष्कर्ष: बंगाल में ‘पुनर्जागरण’ की नई लड़ाई?
ममता बनर्जी का यह रुख संकेत देता है कि वह बंगाल की हार के बाद चुप बैठने वाली नहीं हैं। टैगोर के आदर्शों का हवाला देते हुए उन्होंने निडर लोगों को एकजुट होने का मंत्र दिया है।


