यूपी SIR के बाद सियासी भूचाल: वोटर लिस्ट में बड़ा उलटफेर, बीजेपी और सपा दोनों की बढ़ी टेंशन

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है, जिसमें राज्य की मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नई सूची के अनुसार, यूपी में कुल मतदाता घटकर 13,39,84,792 रह गए हैं, जबकि पहले यह संख्या 15.44 करोड़ थी। यानी करीब 2 करोड़ से अधिक वोटरों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वोटर कमी
SIR के बाद सबसे अधिक गिरावट शहरी और विकसित जिलों में दर्ज की गई है। लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और कानपुर नगर जैसे जिलों में 18.75% से 22.89% तक वोटरों की कमी आई है। इन सभी क्षेत्रों में 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी का मजबूत प्रदर्शन रहा था।
बीजेपी प्रभाव वाले जिलों में बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, कई ऐसे जिले जहां बीजेपी का प्रभाव माना जाता है, वहां वोटर लिस्ट में सबसे ज्यादा कटौती हुई है। साहिबाबाद, नोएडा, लखनऊ उत्तर, आगरा कैंट और इलाहाबाद नॉर्थ जैसी सीटों पर भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।
मुस्लिम बहुल जिलों में कम असर
मुस्लिम बहुल जिलों में वोटर कमी अपेक्षाकृत कम रही है। रामपुर में 12.33%, मुरादाबाद में 10.09%, संभल में 14.47%, बिजनौर में 9.63%, सहारनपुर में 10.48% और मुजफ्फरनगर में 10.38% मतदाता कम हुए हैं।
कई विधानसभा सीटों पर बड़ा बदलाव
राज्य की 16 विधानसभा सीटों पर 1 लाख से ज्यादा वोट कम हुए हैं, जिनमें से 15 सीटें बीजेपी के पास हैं। 21 सीटों पर 80 से 99 हजार, जबकि 82 सीटों पर 50 से 80 हजार वोटरों की कमी दर्ज की गई है।
प्रमुख सीटों पर वोटर गिरावट
साहिबाबाद में 3.16 लाख, नोएडा में 1.83 लाख, लखनऊ कैंट में 1.54 लाख और आगरा कैंट में 1.47 लाख वोटर कम हुए हैं।
लखनऊ और गोरखपुर में भी असर
लखनऊ उत्तर में 1.54 लाख से अधिक मतदाता घटे हैं। वहीं गोरखपुर देहात और गोरखपुर शहर में भी 6% से 11% तक वोटर कम हुए हैं।
चुनावी समीकरणों पर असर की चर्चा
SIR के बाद आई इस नई वोटर लिस्ट ने यूपी के राजनीतिक समीकरणों में हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष इसे लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई है और पात्र मतदाता अब भी नाम जुड़वा सकते हैं।



