ईरान युद्ध: अमेरिका-इजरायल पर बढ़ा दबाव, हथियार और सैनिकों की कमी

जुबिली स्पेशल रिपोर्ट
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और इजरायल की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रह गई है। रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, एक महीने के भीतर ही दोनों देशों को सैन्य संसाधनों, रणनीति और मानव बल के स्तर पर गंभीर दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिका: ‘असीमित हथियार’ के दावे पर उठे सवाल
युद्ध की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप और उनके रक्षा अधिकारियों ने अमेरिका के पास लगभग असीमित हथियार होने का दावा किया था। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञ सेथ जी. जोन्स के अनुसार, अमेरिका में गोला-बारूद की कमी उम्मीद से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती है। लगातार मिसाइल इंटरसेप्शन, एयर डिफेंस सिस्टम के इस्तेमाल और लंबी सैन्य तैनाती ने अमेरिकी स्टॉकपाइल पर भारी दबाव डाला है।
इस स्थिति ने अमेरिका की सप्लाई चेन और डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस की क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

इजरायल: सैनिकों की कमी और कई मोर्चों पर दबाव
दूसरी ओर इजरायल भी अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रहा है। सेना को एक साथ कई मोर्चों पर तैनात रहना पड़ रहा है, जिससे सैनिकों की कमी महसूस होने लगी है।
रिजर्व फोर्स को बार-बार सक्रिय करना पड़ रहा है, जिससे ऑपरेशनल थकान बढ़ रही है। गाजा से लेकर उत्तरी सीमाओं तक जारी तनाव ने सेना की क्षमता पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।
ईरान की बदली रणनीति: सीधे हमलों से बढ़ा खतरा
ईरान ने इस युद्ध में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब वह प्रॉक्सी के बजाय सीधे हमले कर रहा है।
हाल ही में सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि ईरान अब संघर्ष को व्यापक बनाकर अमेरिका पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
क्यों कमजोर पड़ रहे हैं अमेरिका और इजरायल?
इस संघर्ष में दोनों देशों की स्थिति कमजोर होने के पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं:
- लंबा खिंचता युद्ध: शुरुआत में सीमित ऑपरेशन माना जा रहा संघर्ष अब लंबा युद्ध बन चुका है
- संसाधनों की भारी खपत: मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम का लगातार इस्तेमाल
- ईरान की आक्रामक रणनीति: अप्रत्यक्ष युद्ध से सीधे टकराव की ओर बढ़ना
- मल्टी-फ्रंट दबाव: खासकर इजरायल के लिए कई सीमाओं पर एक साथ तनाव
एक महीने के भीतर ही यह स्पष्ट हो गया है कि यह संघर्ष जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। अमेरिका और इजरायल को अब अपनी सैन्य रणनीति, संसाधनों और रक्षा तैयारियों का नए सिरे से आकलन करना होगा।
वहीं ईरान लगातार दबाव बढ़ाने की रणनीति पर कायम है। आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि यह संघर्ष सीमित रहेगा या बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।


