ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बातचीत के संकेत, तेल कीमतों पर नजर

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए कोई समझौता हो जाता है, तो तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है।

बातचीत के संकेत, ईरान तैयार

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि वह अमेरिका की ओर से आई बातचीत की पहल को सुनने के लिए तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, वाशिंगटन की पहल पर दोनों देशों के बीच संपर्क हुआ है, हालांकि अभी तक यह बातचीत औपचारिक स्तर तक नहीं पहुंची है।

बताया जा रहा है कि अलग-अलग मध्यस्थों के जरिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है, जिससे यह समझने की कोशिश की जा रही है कि युद्ध समाप्त करने के लिए कोई ठोस समझौता संभव है या नहीं।

परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का रुख

ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और इस संबंध में आवश्यक गारंटी देने को तैयार है। हालांकि, उसने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के अपने अधिकार पर जोर दिया है।

साथ ही, ईरान का कहना है कि किसी भी संभावित समझौते में उस पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना जरूरी होगा। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल ईरान सीधे तौर पर अमेरिका के साथ आमने-सामने की बातचीत की मांग नहीं कर रहा, लेकिन यदि कोई प्रस्ताव उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होता है, तो वह उस पर विचार करने के लिए तैयार है।

ट्रंप का दावा और चेतावनी

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 48 घंटे के भीतर नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता है।

हालांकि, बाद में उन्होंने अचानक पांच दिनों के लिए हमलों पर रोक लगाने का ऐलान किया और दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक बातचीत हुई है।

वैश्विक बाजार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा और कीमतों में गिरावट आ सकती है। वहीं, अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो ऊर्जा संकट और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

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