ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष तेज, होर्मुज संकट से वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा

एशिया और मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष तेजी से गहराता जा रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुआ यह टकराव अब 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर सीधे हमलों के बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। दोनों पक्षों के बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

क्या-क्या हुआ अब तक?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स पर संभावित हमलों की समय-सीमा पांच दिन बढ़ा दी है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है, जिससे युद्ध खत्म होने की उम्मीद बन सकती है। हालांकि, ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे बाजार को प्रभावित करने की रणनीति बताया है।

सोमवार को वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों को हालात में नरमी की उम्मीद जगी। लेकिन दूसरी ओर ईरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और आसपास के क्षेत्रों में ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रखे, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

उधर इजरायल ने भी तेहरान में कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें रिहायशी इलाके भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा संकट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को लेकर 20 से ज्यादा देशों—जिनमें यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं ने संयुक्त बयान जारी कर चिंता जताई है।

यह अहम समुद्री मार्ग लगभग बाधित हो चुका है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ रहा है।

इस बीच ईरान की सेना के खातम-अल-अनबिया मुख्यालय ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब भी उसका नियंत्रण है और वह फारस की खाड़ी तथा ओमान की खाड़ी के जल क्षेत्र को नियंत्रित कर रहा है।

मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

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