बिहार राज्यसभा चुनाव: पांचवीं सीट पर सस्पेंस, कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी से महागठबंधन की बढ़ी चिंता

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सोमवार को मतदान शुरू हो गया है। इनमें से पांचवीं सीट को लेकर सियासी हलकों में सबसे ज्यादा दिलचस्पी बनी हुई है। दोनों खेमों ने अपने-अपने विधायकों को साधने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

महागठबंधन ने विपक्षी दलों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश की है। AIMIM और बहुजन समाज पार्टी के विधायकों का समर्थन उसे मिल रहा है, लेकिन कांग्रेस के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति ने महागठबंधन की चिंता बढ़ा दी है। वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र कुशवाहा और फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास से पार्टी नेताओं का संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं AIMIM के एक विधायक को लेकर भी महागठबंधन के नेताओं को आशंका बनी हुई है।

कांग्रेस के कई विधायक होटल नहीं पहुंचे

महागठबंधन ने अपने सभी विधायकों को एक होटल में ठहरने का निर्देश दिया था। रविवार दोपहर से विधायक वहां पहुंचने लगे थे। बसपा के एकमात्र विधायक सतीश यादव और AIMIM के विधायक भी होटल पहुंचे। हालांकि कांग्रेस के चार विधायक देर तक होटल नहीं पहुंचे, जिससे पार्टी की चिंता बढ़ गई।

इनमें से चनपटिया से विधायक अभिषेक रंजन और किशनगंज के विधायक कमरुल होदा ही होटल पहुंचे थे। वहीं मनोहर प्रसाद और आबिदुर रहमान से नेताओं की बातचीत जारी है। लेकिन वाल्मीकिनगर के सुरेंद्र कुशवाहा और फारबिसगंज के मनोज विश्वास से संपर्क नहीं हो सका।

बताया जाता है कि सुरेंद्र कुशवाहा 2015 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और हाल ही में उनकी मुलाकात उस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से भी हुई थी। वहीं मनोज विश्वास पहले जदयू और फिर राजद के रास्ते कांग्रेस में आए थे। ऐसे में इन दोनों के क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जा रही है।

एनडीए की रणनीति

राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए क्रॉस वोटिंग के साथ-साथ विपक्षी विधायकों को मतदान से अनुपस्थित कराने की रणनीति पर भी काम कर रहा है। भाजपा के एक नेता के मुताबिक जो विपक्षी विधायक एनडीए के पक्ष में वोट देने को तैयार नहीं हैं, उन्हें मतदान से दूर रहने के लिए मनाने की कोशिश की गई है।

वर्तमान गणित के अनुसार राज्यसभा चुनाव में किसी उम्मीदवार की जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। हालांकि यदि कुछ विधायक मतदान से अनुपस्थित रहते हैं तो जीत का आंकड़ा घट सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर चार विधायक वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते हैं, तो जीत के लिए जरूरी संख्या घटकर 40 रह जाएगी।

ऐसी स्थिति में जिन उम्मीदवारों को 40 से अधिक वोट मिलेंगे, उनके अतिरिक्त वोट दूसरे वरीयता वाले उम्मीदवारों को ट्रांसफर हो जाएंगे। इस समीकरण के तहत एनडीए अपने सभी पांच उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की कोशिश में है।

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