Saturday - 31 January 2026 - 4:58 PM

AI पर भरोसा पड़ा भारी: HIV के डर में खुद ली दवाएं, शख्स को हुआ जानलेवा स्किन रोग

जुबिली न्यूज डेस्क

इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बिना विशेषज्ञ सलाह के भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका चौंकाने वाला मामला दिल्ली से सामने आया है। यहां एक 45 वर्षीय व्यक्ति ने डॉक्टर से संपर्क करने के बजाय AI से सलाह लेकर HIV से बचाव की दवाएं ले लीं, जिसके चलते वह स्टीवन्स जॉनसन सिंड्रोम (SJS) जैसी दुर्लभ और जानलेवा बीमारी का शिकार हो गया।

डॉक्टर की जगह AI से ली सलाह

जानकारी के मुताबिक, असुरक्षित यौन संबंध के बाद व्यक्ति को HIV संक्रमण का शक हुआ। आम तौर पर ऐसे मामलों में डॉक्टर पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) दवाएं लिखते हैं, जिन्हें 72 घंटे के भीतर और सख्त मेडिकल निगरानी में लिया जाता है।लेकिन मरीज ने डॉक्टर से परामर्श लेने की बजाय AI से जानकारी हासिल की और स्थानीय मेडिकल स्टोर से बिना पर्ची HIV की दवाएं खरीद लीं

दवाओं का गलत इस्तेमाल बना खतरा

डॉक्टरों के अनुसार, मरीज ने HIV की दवाओं का पूरा 28 दिन का कोर्स खुद ही शुरू कर दिया। करीब एक हफ्ते बाद उसके शरीर पर लाल चकत्ते और जलन शुरू हुई, लेकिन इसके बावजूद उसने दवाएं बंद नहीं कीं।
कुछ ही दिनों में आंखों, मुंह और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर दिक्कतें बढ़ने लगीं, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

जांच में सामने आई गंभीर बीमारी

मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की कि मरीज स्टीवन्स जॉनसन सिंड्रोम से पीड़ित है। यह दवाओं के कारण होने वाला एक बेहद गंभीर एलर्जिक रिएक्शन है, जिसमें त्वचा और म्यूकोसा को भारी नुकसान पहुंचता है। फिलहाल मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया है और डॉक्टर उसकी स्थिति को नाजुक बता रहे हैं।

डॉक्टरों ने यह भी सवाल उठाया है कि इतनी संवेदनशील दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के कैसे उपलब्ध हो गईं, जबकि अब ये दवाएं सामान्य तौर पर डॉक्टर भी सोच-समझकर ही लिखते हैं।

क्या है स्टीवन्स जॉनसन सिंड्रोम?

स्टीवन्स जॉनसन सिंड्रोम एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा बीमारी है, जिसमें:

  • त्वचा पर तेज रैश और फफोले बनते हैं

  • त्वचा की ऊपरी परत उतरने लगती है

  • आंख, मुंह और गुप्तांगों की म्यूकोसा प्रभावित होती है

यह बीमारी आमतौर पर दवाओं से होने वाले गंभीर एलर्जिक रिएक्शन के कारण होती है। समय पर इलाज न मिले तो संक्रमण, अंग फेल होने और मौत तक का खतरा बढ़ सकता है।

SJS और TEN में क्या अंतर है?

अक्सर स्टीवन्स जॉनसन सिंड्रोम (SJS) और टॉक्सिक एपिडर्मल नेक्रोलिसिस (TEN) को एक ही बीमारी का हिस्सा माना जाता है।

  • SJS में त्वचा का छिलना शरीर के 10% से कम हिस्से तक सीमित रहता है

  • जबकि TEN में यह 30% से अधिक हिस्से को प्रभावित करता है

दोनों ही स्थितियां बेहद गंभीर और जानलेवा हो सकती हैं।

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क्या सबक मिलता है इस मामले से?

यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि:

  • AI या इंटरनेट डॉक्टर का विकल्प नहीं हो सकता

  • बिना मेडिकल सलाह दवाएं लेना जानलेवा साबित हो सकता है

  • संवेदनशील दवाओं की खुलेआम बिक्री पर सख्त निगरानी जरूरी है

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में योग्य डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

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