जुबिली न्यूज डेस्क
बुंदेलखंड की बीहड़ों में बसी पचनद संगम की पावन नगरी से गुरुवार को जल सहेलियों की अविरल-निर्मल यमुना यात्रा का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह यात्रा न केवल यमुना नदी के संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि नदियों को जीवनरेखा मानने वाली हमारी सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित करने का संकल्प भी है। मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने हरी झंडी दिखाकर इस 500 किलोमीटर लंबी पदयात्रा को दिल्ली तक रवाना किया।
पचनद धाम: पौराणिक महत्व की भूमि
पचनद धाम, जो जालौन जिले के उरई तहसील के बीहड़ इलाके में स्थित है, विश्वविख्यात पांच नदियों- बेतवा, केन, सिन्ध, पहूज और लम्हेगांव का अद्भुत संगम स्थल है। विष्णु पुराण में वर्णित इस स्थान को बुंदेलखंड का प्रयाग कहा जाता है, जहां कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर हजारों श्रद्धालु स्नान कर पुण्य लाभ लेते हैं। बाबा साहब मंदिर कंजोसा पर आयोजित भव्य समारोह में सैकड़ों जल सहेलियां, स्थानीय ग्रामीण, प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता एकत्र हुए। माहौल भक्ति, उत्साह और पर्यावरण जागरूकता से सराबोर था। दीप प्रज्वलन, मंगल पाठ और नदी आरती के बीच यात्रा का शुभारंभ हुआ, जो एक महीने तक चलेगा।

जल सहेलियों का संकल्प: नदियों को बहते रहने दें
जल सहेली संगठन की महिलाओं ने इस यात्रा को ‘अविरल-निर्मल यमुना यात्रा’ नाम देकर नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित न करने का संदेश दिया। संगठन के संस्थापक संजय सिंह ने बताया कि यह जनजागरण अभियान बुंदेलखंड से दिल्ली तक पैदल तय करेगा, जिसमें जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह जैसे पर्यावरणविद् भी सहयोग कर रहे हैं। डॉ. सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा, “नदियां हमारी मां हैं, उनकी जिम्मेदारी समाज की है। बांध, अतिक्रमण और प्रदूषण से त्रस्त यमुना को पुनः निर्मल बनाना हमारा कर्तव्य है।” उन्होंने यात्रा को नदियों के पुनर्जीवन की सांस्कृतिक क्रांति करार दिया।
यात्रा का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीणों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और नदी तटों पर वृक्षारोपण के प्रति जागरूक करना है। जल सहेलियां पैदल चलते हुए प्रत्येक गांव में कार्यशालाएं आयोजित करेंगी, जहां महिलाओं को नदी सफाई के उपाय सिखाए जाएंगे। संगठन का मानना है कि महिलाएं घर की लक्ष्मी ही नहीं, जल की रक्षक भी हैं। इस यात्रा में 100 से अधिक महिलाएं शामिल हैं, जो पारंपरिक वेशभूषा में नदी मां के चित्र लिए आगे बढ़ रही हैं।
मंत्री पटेल का उद्बोधन: समाज ऋणी रहेगा
मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा, “जल सहेलियों के इस नेक प्रयास का समाज हमेशा ऋणी रहेगा। नदियां हमारी सभ्यता की धरोहर हैं, इन्हें बचाना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।” उन्होंने पचनद संगम को बुंदेलखंड का आध्यात्मिक केंद्र बताते हुए जल संरक्षण को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का आश्वासन दिया। जालौन जिलाधिकारी राजेश पांडेय ने प्रशासन का पूर्ण समर्थन दोहराया, जबकि पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने का वचन दिया। स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी मंच साझा किया।
यात्रा का मार्ग और भविष्य की योजनाएं
पचनद से प्रारंभ होकर यह यात्रा जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। मार्ग में प्रमुख संगम स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और जागरूकता सभाएं होंगी। यात्रा के दौरान जल परीक्षण किटों से यमुना के जल की गुणवत्ता जांच की जाएगी और रिपोर्ट जारी होगी। संगठन दिल्ली में यमुना तट पर समापन समारोह आयोजित करने की योजना बना रहा है, जहां केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
यह यात्रा केवल पदयात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन है। जल सहेलियों ने संकल्प लिया कि वे नदियों को दूधिया सफेद रखने के लिए जीवन समर्पित करेंगी। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे लोक अभियान ही बड़े बदलाव ला सकते हैं। बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्र में यह पहल वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देगी।
सांस्कृतिक आयोजन और जन सहयोग
शुभारंभ समारोह में लोक नृत्य, भजन और नदी भक्ति गीतों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। स्थानीय कलाकारों ने यमुना मां की महिमा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी। ग्रामीण महिलाओं ने घरेलू उपायों से बने जल संरक्षण मॉडल प्रदर्शित किए। आयोजन में स्कूली बच्चों ने नारे लगाए- “नदी मां को बचाओ, जीवन को बचाओ।” यह दृश्य बुंदेलखंड की एकजुटता का प्रतीक था।
जल सहेली संगठन ने अब तक सैकड़ों तालाबों का निर्माण और नदी सफाई अभियान चलाए हैं। इस यात्रा से प्रेरित होकर अन्य राज्यों से भी सहयोग की पेशकश मिल रही है। पर्यावरण प्रेमी सोशल मीडिया पर #यमुना_यात्रा ट्रेंड करा रहे हैं।
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