जुबिली न्यूज डेस्क
लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में 6 मजारों को तोड़ने का नोटिस जारी होने के बाद अब यह मामला राजनीति और धार्मिक संवेदनाओं के बीच गरमाया है। 23 मार्च 2026 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन मजारों को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया था।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद का पत्र
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने KGMU प्रशासन को पत्र लिखकर कहा है कि शाहमीना शाह और हरमैन शाह की मजारें लगभग 700 साल पुरानी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है और इन मजारों को न तोड़ा जाए।
मौलाना महमूद मदनी ने भी नोटिसों पर गहरी चिंता जताते हुए कॉलेज प्रशासन को चेताया कि भ्रामक प्रचार की आड़ में वक्फ संपत्तियों का उल्लंघन न करें। उन्होंने प्रशासन से सभी नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की।
लोगों का बयान
एबीपी न्यूज की टीम जब शाहमीना शाह की मजार पर पहुंची, तो वहां मौजूद लोगों ने बताया कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है, लेकिन पिछले साल हरमैन शाह की मजार के आसपास के चीजें प्रशासन ने तोड़ी थीं।
शाहमीना शाह के खादिम नासिर मीनाई ने कहा:”हम इस मामले में कोर्ट जाएंगे। ये मजारें पुरानी हैं और इन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।”
KGMU का पक्ष
KGMU के प्रवक्ता केके सिंह ने बताया कि हरमैन शाह और शाहमीना शाह की मजार को तोड़ने का कोई नोटिस नहीं दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि जिन 6 मजारों को नोटिस मिला है, वे पिछले कुछ दशकों में बनी हैं और अवैध रूप से निर्मित मानी जाती हैं।
केके सिंह ने यह भी कहा कि अगर इन मजारों से जुड़े लोगों के पास वैध दस्तावेज़ या प्रमाण पत्र हैं, तो उन्हें 15 दिनों के अंदर प्रशासन को दिखाना होगा, अन्यथा विश्वविद्यालय कोर्ट के नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा।
अब आगे क्या होगा
मामला अब कोर्ट में पहुंच सकता है, और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दखल के बाद इस विवाद में नया मोड़ देखने को मिल सकता है। प्रशासन और समुदाय के बीच संवाद और कानूनी प्रक्रिया पर अब सभी की नजर टिकी हुई है।
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