यूपी की संगमनगरी प्रयागराज में चल रहे माघ मेले 2026 में 18 जनवरी को हुई कथित हिंसक घटना को लेकर कोर्ट ने अब आदेश जारी किया है। मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप पार्चा की कोर्ट ने आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को 6 फरवरी तक जांच रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
क्या है आरोप?
आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि 18 जनवरी को माघ मेले में सेक्टर-6 स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति शिविर के पास निकली श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा पर कथित रूप से हमला किया गया। उनके अनुसार:
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायियों ने आम रास्तों पर अवैध जाम लगाकर यात्रा को रोकने की कोशिश की।
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विरोध करने पर लोगों पर सामूहिक हिंसक हमला किया गया और वादी का गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की गई।
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घटना में श्रीकृष्ण सेना के पदाधिकारी घायल हुए और ठाकुर श्री केशवदेव जी महाराज की प्रतिमा गिर गई।
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इसके बाद भी वादी को फोन पर शिकायत वापस लेने का दबाव और धमकियां मिलीं।
शंकराचार्य पद का दुरुपयोग
प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ‘शंकराचार्य’ पद का अवैध उपयोग कर श्रद्धालुओं को गुमराह किया।
अर्जी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, अरविंद मिश्रा, मुकुंदानंद और कई अज्ञात लोगों को विपक्षी बनाया गया है और कोर्ट से बीएनएस की धारा 175 के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश मांगा गया है।
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