जुबिली न्यूज डेस्क
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के 2026 के नए इक्विटी रेगुलेशंस पर अंतरिम रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया नियमों की भाषा अस्पष्ट है और उनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है और एसजी को कहा है कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ
-
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है, इसलिए इसके ऑपरेशन पर रोक रहेगी जब तक कि नियमों को फिर से तैयार नहीं किया जाता।
-
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने बताया कि 2012 के नियमों के खिलाफ लंबित याचिका अब 2026 के नए नियमों द्वारा प्रतिस्थापित हो गई है।
-
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पुराने नियमों की जांच करते समय हम इससे अधिक पीछे नहीं जा सकते।
-
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अनुच्छेद 15(4) राज्यों को एससी/एसटी के लिए विशेष कानून बनाने का अधिकार देता है, लेकिन प्रगतिशील कानून में प्रतिगामी रुख क्यों होना चाहिए।
वकील की दलीलें
-
वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि नियमों के सेक्शन 3C में जाति आधारित भेदभाव किया गया है।
-
उनका कहना था कि यह अनुच्छेद 14 और 19 के खिलाफ है और शिक्षा के क्षेत्र में समाज में खाई बढ़ाने वाला है।
-
जैन ने कहा कि नियमों में वर्गीकरण अनुच्छेद 14 के विपरीत है और जाति आधारित भेदभाव के प्रावधान पर रोक की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
-
सीजेआई ने कहा कि न्यायालय समानता के अधिकार पर गौर कर रहा है।
-
उन्होंने केंद्र से कहा कि एक विशेषज्ञ समिति गठित करें, ताकि नियमों का दुरुपयोग न हो।
-
कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि यह नियम क्या समानता के अधिकार के अनुरूप हैं या नहीं और इस पर विस्तृत जवाब देने के लिए कहा।
ये भी पढ़ें-दिल्ली हाईकोर्ट ने IRS समीर वानखेड़े की याचिका खारिज की, ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ पर रोक नहीं
पूरे देश में विरोध
यूजीसी के नए नियमों को लेकर पूरे देश में भारी विरोध मचा हुआ है। छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह नियम सामान्य वर्ग और छात्रों के बीच भेदभाव पैदा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट की इस रोक से फिलहाल नियमों का क्रियान्वयन रुक गया है।
Jubilee Post | जुबिली पोस्ट News & Information Portal
