“यूजीसी नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का जोरदार विरोध, सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक गरमाया विवाद”

जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली। यूजीसी (UGC) की नई गाइडलाइंस को लेकर देशभर में विरोध तेज होता जा रहा है। सवर्ण समाज ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मोर्चा खोल दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि केंद्र सरकार को इस मामले में बैकफुट पर आकर कानूनी सलाह लेनी पड़ी है।

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अब तक 20 से अधिक याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। याचिकाकर्ताओं ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है, जिस पर कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से जल्द लिस्टिंग का भरोसा दिया गया है।
सोनभद्र से दिल्ली तक उबाल, सड़कों पर जनसैलाब
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में यूजीसी के खिलाफ सवर्ण समाज का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। कलेक्ट्रेट परिसर जनसैलाब से भर गया, जहां छात्र हितों के नाम पर यूजीसी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने नियम वापस नहीं लिए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान एक युवक ने खून से लिखा रक्तपत्र जिलाधिकारी को सौंपकर विरोध दर्ज कराया, जिसने माहौल को और गरमा दिया।
जौनपुर और रायबरेली में भी उग्र विरोध
जौनपुर में सवर्ण आर्मी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए यूजीसी के नए नियमों को “काला कानून” बताया। प्रदर्शनकारियों ने खुली चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
वहीं रायबरेली में बीजेपी के किसान नेता रमेश बहादुर सिंह ने पार्टी के सवर्ण विधायकों और सांसदों को चूड़ियां भेजकर विरोध जताया।इसी कड़ी में सलोन विधानसभा से बीजेपी किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष श्यामसुंदर त्रिपाठी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने दावा किया कि इस्तीफा सीधे प्रधानमंत्री को भेजा गया है, न कि संगठन को।
मेरठ में ठाकुर समाज का ऐलान—वोट बहिष्कार की चेतावनी
मेरठ में ठाकुर समाज ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सामूहिक शपथ ली। समाज के लोगों ने ऐलान किया कि अगर सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया, तो बीजेपी को वोट नहीं दिया जाएगा। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
छात्रों की आशंका—कैंपस में बढ़ेगी अराजकता
दिल्ली में यूजीसी दफ्तर के बाहर भी सवर्ण समाज और छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि नए नियमों से—
-
झूठे आरोपों की संभावना बढ़ेगी
-
प्रमाण का पूरा बोझ आरोपी छात्र पर होगा
-
गलत आरोप झेलने वालों के लिए कोई सुरक्षा तंत्र नहीं है
दिल्ली विश्वविद्यालय के एक पीएचडी छात्र ने कहा कि“इन नियमों से कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पूरी तरह अराजकता फैल सकती है।”
सरकार की रणनीति: शीर्ष कानूनविदों से सलाह
विवाद गहराने के बाद केंद्र सरकार ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से परामर्श किया है। सरकार ने यूजीसी के नए नियमों के कानूनी पहलुओं और सुप्रीम कोर्ट के जातिगत भेदभाव से जुड़े पुराने फैसलों पर विस्तार से चर्चा की है।सरकार सभी याचिकाओं और विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय करने में जुटी है।
क्या बदलेगा फैसला?
देशभर में बढ़ते विरोध, राजनीतिक दबाव और सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या केंद्र सरकार यूजीसी के नए नियमों में संशोधन करेगी या उन्हें पूरी तरह वापस लिया जाएगा?



