जुबिली स्पेशल डेस्क
ढाका/नई दिल्ली।बांग्लादेश में 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल और शेख हसीना सरकार के पतन से जुड़ी एक कथित अमेरिकी डिप्लोमैटिक रिकॉर्डिंग लीक होने के बाद नया सियासी बखेड़ा खड़ा हो गया है।
इस ऑडियो के सामने आने के बाद सत्तारूढ़ अवामी लीग ने अमेरिका की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अवामी लीग का आरोप है कि शेख हसीना सरकार का गिरना कोई स्वाभाविक या “ऑर्गेनिक” राजनीतिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश काम कर रही थी।
बांग्लादेश के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि लीक हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग अवामी लीग के लंबे समय से लगाए जा रहे आरोपों को सही साबित करती है।
नेपाल से बांग्लादेश तक सरकारें गिरने का पैटर्न?
बीते कुछ वर्षों में बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में सरकारों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। फ्रांस में भी इसी तरह की कोशिशें देखने को मिलीं, हालांकि वहां वे नाकाम रहीं। इन सभी घटनाओं में एक समान नाम सामने आता रहा है—अमेरिका।
हालांकि इन आरोपों को लेकर अब तक कोई ठोस या आधिकारिक सबूत सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पर लगातार चर्चा होती रही है।

क्या है लीक हुई अमेरिकी डिप्लोमैट की बातचीत?
बांग्लादेश से जुड़ी इस नई लीक रिकॉर्डिंग ने वॉशिंगटन को आरोपों के केंद्र में ला दिया है। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान स्ट्रैटन्यूज ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑडियो में एक सीनियर अमेरिकी डिप्लोमैट बांग्लादेश की इस्लामी राजनीतिक ताकतों से संपर्क और शेख हसीना के बाद के राजनीतिक हालात को लेकर चर्चा करते हुए सुनाई देते हैं।
इस लीक के बाद बांग्लादेश में अमेरिका की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। वहीं, अवामी लीग को मौजूदा यूनुस सरकार पर हमले तेज करने का भी मौका मिल गया है।
पूर्व मंत्री का बड़ा आरोप
पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने कहा कि यह लीक ऑडियो चुनाव के बाद बनने वाली सरकारों को “मैनेज” करने की खुली साजिश की ओर इशारा करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की साजिशों के बांग्लादेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोकने की किसी भी कोशिश पर कड़ा ऐतराज जताया। चौधरी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में से एक को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करना, मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को उनके अधिकार से वंचित करने जैसा होगा, जिससे बिना जनादेश वाली एक अवैध सरकार का रास्ता साफ होगा।
दिल्ली में रह रहीं शेख हसीना
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। सत्ता से हटने के बाद से वह भारत की राजधानी दिल्ली में रह रही हैं।
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