अशोक बांबी
जी नहीं। उत्तर प्रदेश की टीम भले ही झारखंड के खिलाफ एक पारी और 301 रनों से हार गई हो, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि उत्तर प्रदेश का क्रिकेट धरातल में चला गया है।
उत्तर प्रदेश में होनहार खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। बशर्ते सही खिलाड़ियों का चयन किया जाए, किसी भी प्रकार का पक्षपात न हो, कोई बाहरी दबाव न हो और न ही बाहर के खिलाड़ियों को तरजीह दी जाए, तो निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की टीम राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने में सक्षम है।
अगर निष्पक्ष रूप से देखा जाए तो इस वर्ष रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा।
इसका मुख्य कारण एक ओर सही खिलाड़ियों का चयन न होना और दूसरी ओर संघ के कुछ पदाधिकारियों का अनावश्यक हस्तक्षेप रहा। इसके अलावा टीम के तीन बेहतरीन खिलाड़ियों की अनुपस्थिति भी बड़ा कारण बनी।
कुलदीप यादव और ध्रुव जुरेल लगातार भारतीय टीम से जुड़े रहे, वहीं रिंकू सिंह भी केवल एक-आध मैच ही खेल सके।
रिंकू सिंह की कप्तानी में उत्तर प्रदेश की टीम ने विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया। यदि ध्रुव जुरेल सौराष्ट्र के खिलाफ मुकाबले में उपलब्ध होते, तो निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की टीम विजय हजारे ट्रॉफी जीतकर लौटती।
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर भी मानते हैं कि जितना टैलेंट उत्तर प्रदेश में है, उतना देश के किसी अन्य राज्य में नहीं है।

अब तक अंडर-19 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उत्तर प्रदेश से लगभग 40–50 खिलाड़ी भारतीय टीम के लिए खेल चुके हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम खिलाड़ी सीनियर भारतीय टीम तक पहुंच पाए।
वहीं कई खिलाड़ी ऐसे भी रहे जो राज्य की रणजी टीम तक में जगह नहीं बना सके। यह साफ दर्शाता है कि कहीं न कहीं प्रदेश क्रिकेट के संचालन में गंभीर खामियां रही हैं।
समय-समय पर अयोग्य व्यक्तियों को महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंपना भी टीम की असफलता का एक बड़ा कारण रहा है।
इस वर्ष उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ ने एक सकारात्मक कदम उठाते हुए पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रवीण कुमार को चयन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया गया। खिलाड़ियों के चयन में बाहरी हस्तक्षेप की झलक साफ दिखाई दी।
यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष हो, तो चयन समिति में पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को शामिल किया जाना चाहिए, न कि ऐसे लोगों को बार-बार जिम्मेदारी दी जाए जिन्होंने स्वयं आधा-अधूरा रणजी करियर खेला हो।
उत्तर प्रदेश का आखिरी मुकाबला विदर्भ के खिलाफ है, जो हमारे लिए लगभग औपचारिकता भर रह गया है। विदर्भ के लिए यह मैच बेहद अहम है, जबकि उत्तर प्रदेश की टीम केवल अपनी साख बचाने की कोशिश करेगी। ऐसे में बेहतर होगा कि अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मौका दिया जाए।
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