जुबिली स्पेशल डेस्क
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर पर दिए गए अपने बयान को लेकर उन्हें किसी तरह का कोई पछतावा नहीं है।
थरूर का कहना है कि संसद के भीतर उन्होंने कभी भी कांग्रेस के घोषित रुख का उल्लंघन नहीं किया और पार्टी से उनकी एकमात्र सार्वजनिक असहमति इसी मुद्दे को लेकर रही है।
तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने शनिवार को केरल लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा,
“मैं पिछले 17 साल से कांग्रेस पार्टी में हूं।
कुछ ऐसे विषय हैं, जिन पर मैं पार्टी नेतृत्व से सीधे बात करना चाहता हूं।”उन्होंने यह भी कहा कि आंतरिक मतभेदों पर सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय संगठन के भीतर चर्चा करना ज्यादा उचित है।
थरूर ने बताया कि वह जल्द ही संसद सत्र के लिए दिल्ली जाएंगे और उन्हें भरोसा है कि पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने और उनका नजरिया समझने का मौका मिलेगा।

पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की बात
केरल विधानसभा चुनाव को लेकर हाल ही में हुई एक अहम बैठक में शामिल न होने के सवाल पर शशि थरूर ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि लगातार यात्राओं के कारण वे बैठक में शामिल नहीं हो सके थे और इसकी जानकारी उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को दे दी थी, जिसे स्वीकार भी किया गया।
थरूर ने कहा कि उनसे जुड़ी कुछ खबरें सही हो सकती हैं, जबकि कुछ पूरी तरह गलत भी। उन्होंने जोर देते हुए कहा,
“इसका यह मतलब कतई नहीं है कि मैं पार्टी से अलग हो गया हूं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में कांग्रेस की सभी गतिविधियों में वे सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे और इसी दौरान पार्टी नेतृत्व से भी मुलाकात कर सकते हैं।
राष्ट्रहित सर्वोपरि
कोच्चि में हुए पार्टी कार्यक्रम से जुड़े सवालों पर थरूर ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्रहित के मामलों में भारत सर्वोपरि होना चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी नेतृत्व से उनके मतभेदों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं और यह दावा किया जा रहा है कि राज्य स्तर पर उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
पहलगाम घटना के बाद लिखा लेख
शशि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि पहलगाम घटना के बाद उन्होंने एक लेखक और पर्यवेक्षक के तौर पर एक अखबार में लेख लिखा था।
इसमें उन्होंने कहा था कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए और ठोस कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन भारत को पाकिस्तान के साथ लंबे टकराव में उलझने से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी भी कार्रवाई को आतंकवादी ठिकानों तक सीमित रखा जाना चाहिए।
भारत सरकार ने वही किया
कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्हें हैरानी हुई जब भारत सरकार ने वही कदम उठाए, जैसा उन्होंने अपने लेख में सुझाया था। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का हवाला देते हुए कहा,“जब भारत की सुरक्षा, उसका अस्तित्व और दुनिया में उसका स्थान दांव पर हो, तो भारत सबसे पहले आता है।”
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