जुबिली स्पेशल डेस्क
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच हाल के दिनों में ऐसा संकेत मिल रहा था कि दोनों देशों के रिश्तों में कुछ नरमी आ रही है।
बातचीत की संभावनाएं बढ़ रही थीं, लेकिन अब हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है और पूरी दुनिया की निगाहें इस टकराव पर टिकी हुई हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि मिडिल ईस्ट की ओर अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा भेजा जा रहा है, जिसे उन्होंने ‘आर्माडा’ बताया। इसके बाद हालात और ज्यादा गंभीर हो गए।
फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों ने सुरक्षा कारणों से पैसेंजर फ्लाइट्स रद्द कर दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल ने भी अपना हवाई क्षेत्र खाली कर दिया है।
इलाके में अमेरिका का विशाल युद्धपोत USS Abraham Lincoln समेत कई सैन्य ताकतें तैनात हैं, जिससे बड़े संघर्ष की आशंका और गहराती जा रही है।

छोटा हमला भी बनेगा पूरी जंग की वजह
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका के सैन्य जमावड़े को खुली धमकी करार दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका की ओर से किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई हुई,चाहे वह सीमित हो या ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, तो ईरान इसे पूर्ण युद्ध मानेगा और उसी स्तर पर जवाब देगा। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका की तरफ से एक भी गोली चली तो ईरान अपनी पूरी ताकत झोंक देगा।
अमेरिकी तैनाती के जवाब में ईरान हाई अलर्ट पर
ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी मीडिया में खबरें आईं कि एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन, तीन मिसाइल-सुसज्जित युद्धपोत और F-15 फाइटर जेट्स को मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है।
इसके जवाब में ईरान ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रख दिया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि यह सैन्य जमावड़ा सीधे टकराव के लिए नहीं है, लेकिन हर हालात से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तैयार है।
ईरान के सैन्य नेतृत्व ने भी सख्त चेतावनी दी है। सेना के प्रवक्ता ने कहा कि अगर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ कोई भी कदम उठाया गया, तो इसके नतीजे बेहद खतरनाक होंगे। वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने कहा कि ईरान की ‘उंगली ट्रिगर पर’ है।
अंदरूनी संकट से जूझ रहा है ईरान
यह सारा तनाव ऐसे वक्त में बढ़ रहा है जब ईरान पहले से ही गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रहा है। महीनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर सख्ती की गई है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक लगभग 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है।
पिछले हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने सैन्य कार्रवाई से कदम पीछे खींच लिए थे, क्योंकि ईरान ने भरोसा दिलाया था कि गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं दी जाएगी। उस बयान के बाद ऐसा लगा था कि हालात ठंडे पड़ रहे हैं, लेकिन अब ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
हवाई सेवाओं पर भी पड़ा असर
इस बढ़ते तनाव का असर जमीन के साथ-साथ आसमान में भी दिखने लगा है। फ्रांस की एयर फ्रांस और नीदरलैंड की KLM ने इजरायल, दुबई और सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं।
एयरलाइंस के मुताबिक, सुरक्षा चिंताओं के चलते कम से कम रविवार तक फ्लाइट्स बंद रहेंगी। इससे पहले जर्मनी की लुफ्थांसा ग्रुप भी इजरायल के लिए रात की उड़ानें रोक चुकी है।
हालांकि इजरायली सेना का कहना है कि आम नागरिकों के लिए कोई नई चेतावनी जारी नहीं की गई है और हालात पर पूरी नजर रखी जा रही है। बावजूद इसके, यूरोपीय एयरलाइंस के फैसले यह साफ संकेत दे रहे हैं कि दुनिया इस संभावित टकराव को हल्के में नहीं ले रही।
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