जुबिली स्पेशल डेस्क
ग्रीनलैंड पर कब्ज़े की अपनी ज़िद के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब नाटो सहयोगी ब्रिटेन को निशाने पर ले लिया है।
ट्रंप ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीप समूह को लेकर हुए समझौते को “महान मूर्खता” करार दिया है। हैरानी की बात यह है कि यही डील मई 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा ऐतिहासिक उपलब्धि बताकर सराही गई थी।
चागोस डील को लेकर ब्रिटेन पर ट्रंप का हमला
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा,“यह चौंकाने वाला है कि हमारा ‘बुद्धिमान’ नाटो सहयोगी यूनाइटेड किंगडम अमेरिका के सबसे अहम सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया वाले द्वीप को मॉरीशस को सौंपने जा रहा है, और इसके पीछे कोई ठोस वजह नज़र नहीं आती।”
उन्होंने कहा कि डिएगो गार्सिया जैसे रणनीतिक रूप से अहम सैन्य ठिकाने को छोड़ना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से गंभीर भूल है।
‘रूस-चीन को मिलेगा फायदा’
ट्रंप ने दावा किया कि इस फैसले से रूस और चीन जैसी ताकतों को फायदा हो सकता है। उनके मुताबिक,
“दुनिया की बड़ी शक्तियां सिर्फ ताकत को पहचानती हैं, और ब्रिटेन का यह कदम कमजोरी दर्शाता है।”
ग्रीनलैंड के दावे को दी नई हवा
ब्रिटेन की इस डील को ट्रंप ने सीधे ग्रीनलैंड पर अपने दावे से जोड़ते हुए कहा कि अहम ज़मीन छोड़ना एक बड़ी भूल है और यही कारण है कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड का अधिग्रहण ज़रूरी है। उन्होंने डेनमार्क और उसके सहयोगियों को “सही फैसला” लेने की सलाह भी दी।
मई 2025 में इसी डील को बताया था ऐतिहासिक
दिलचस्प यह है कि मई 2025 में जब ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच यह समझौता हुआ था, तब ट्रंप प्रशासन ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया था।
तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि यह डील डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को लंबे समय तक सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए ज़रूरी है। अब कुछ ही महीनों में ट्रंप का रुख पूरी तरह बदल गया है।

क्या है चागोस द्वीप समूह का विवाद?
चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में 60 से अधिक द्वीपों का समूह है। पहले यह फ्रांस और फिर 1814 से ब्रिटेन के नियंत्रण में रहा।
1965 में ब्रिटेन ने इसे मॉरीशस से अलग कर दिया और अमेरिकी सैन्य अड्डा बनाने के लिए करीब 2,000 स्थानीय निवासियों को वहां से हटा दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने ब्रिटेन से इसे औपनिवेशिक शासन मानते हुए मॉरीशस को लौटाने की सिफारिश की है। 2022 से दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी, जो अंततः मई 2025 में डील पर पहुंची।
डील की शर्तें और रणनीतिक अहमियत
समझौते के तहत ब्रिटेन, डिएगो गार्सिया द्वीप को कम से कम 99 वर्षों के लिए पट्टे पर रखने के बदले मॉरीशस को भुगतान करेगा।हालांकि ब्रिटेन में कई विपक्षी नेताओं ने इसका विरोध किया है और चीन-रूस के बढ़ते दखल का खतरा बताया है।
डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बेहद अहम सैन्य ठिकाना है, जहां करीब 2,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। हाल ही में यहां परमाणु क्षमता से लैस B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स की तैनाती भी की गई है। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की सनक में अब चागोस डील भी सियासी निशाने पर आ गई है।
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