जुबिली स्पेशल डेस्क
पटना से एक बेहद दर्दनाक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने बिहार में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रही, बल्कि यह सरकार और पुलिस की विश्वसनीयता की कसौटी बन चुकी है।
राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली NEET अभ्यर्थी छात्रा 11 जनवरी 2026 (रविवार) को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई। शुरुआत में पटना पुलिस ने मौत की वजह नींद की गोलियों या ओवरडोज़ को बताया, लेकिन परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए यौन उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा
मामला तब और गंभीर हो गया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया गया। परिवार का कहना है कि छात्रा हॉस्टल में अकेली थी और उसके शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं। पोस्टमार्टम के निष्कर्षों ने पुलिस के शुरुआती बयानों को कटघरे में खड़ा कर दिया।
दबाव बढ़ने के बाद पुलिस ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया है और कई अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी के अधीन एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है, जिसकी निगरानी खुद आईजी स्तर से की जा रही है।
परिवार के गंभीर आरोप
पीड़िता के पिता का कहना है कि उनकी बेटी एक मेधावी छात्रा थी और उसका सपना एम्स से डॉक्टर बनने का था। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान न तो पुलिस और न ही डॉक्टरों की ओर से परिवार को सही जानकारी दी गई। इतना ही नहीं, केस दबाने के लिए 15 लाख रुपये तक की पेशकश किए जाने का भी दावा किया गया है।
परिवार का यह भी आरोप है कि छात्रा इलाज के दौरान होश में थी, लेकिन कथित तौर पर उसे शांत करने के लिए दवाइयां दी गईं। इन आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही है।
सड़कों पर उतरे लोग, पुलिस-प्रदर्शनकारियों में तनाव
मामले के सामने आने के बाद आम जनता, छात्र संगठन और सामाजिक समूह सड़कों पर उतर आए। परिजनों ने शव के साथ कारगिल चौक पर जाम लगाया, जिससे पटना का यातायात ठप हो गया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव और झड़प की स्थिति भी बनी। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की शुरुआती भूमिका को लेकर तीखी नाराज़गी देखने को मिल रही है।

रेप मामलों में कानून और सजा
भारतीय कानून में रेप को गंभीर अपराध माना गया है। IPC की धारा 376, 376(डी), 376(एबी), 302, 201 और 120B/34 के तहत ऐसे मामलों में आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सजा का प्रावधान है। मेडिकल और फॉरेंसिक जांच—जैसे डीएनए, चोटों के निशान, कपड़े और विसरा—कोर्ट में अहम सबूत माने जाते हैं।
प्रशांत किशोर भी पहुंचे SSP कार्यालय
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर शनिवार को पीड़िता के परिजनों के साथ पटना के SSP कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि लोगों को उम्मीद है कि SIT निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।
महिला और छात्र सुरक्षा पर बड़ा सवाल
पटना NEET छात्रा की संदिग्ध मौत अब बिहार में महिला सुरक्षा, हॉस्टल व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ी बहस बन चुकी है। पुलिस की शुरुआती लापरवाही और विरोधाभासी बयानों ने जनता का भरोसा डगमगाया है। अब इस मामले में निष्पक्ष, तेज़ और पारदर्शी जांच ही न केवल पीड़िता के परिवार को न्याय दिला सकती है, बल्कि आम लोगों का विश्वास भी बहाल कर सकती है।
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