जुबिली न्यूज डेस्क
मुंबई। महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव में रुझान अब पूरी तरह नतीजों में बदलने लगे हैं और तस्वीर साफ होती जा रही है। इस चुनाव में महायुति (बीजेपी–शिवसेना शिंदे गुट) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए राज्य की ज्यादातर नगरपालिकाओं में बढ़त और जीत दर्ज की है। सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर मुंबई महानगरपालिका (BMC) में देखने को मिला है, जहां 20 साल बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना का किला ढह गया और अब यहां महायुति का मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है।

BMC में बदली सत्ता की तस्वीर
227 वार्डों वाली BMC में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीजेपी को करीब 90 सीटें, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 28 सीटें, जबकि उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को 63 सीटें मिली हैं। कांग्रेस 12 और मनसे 6 सीटों पर सिमट गई है। लंबे समय से बीएमसी पर अविभाजित शिवसेना का दबदबा रहा था, लेकिन इस बार जनता ने सत्ता का रुख बदल दिया।
मुंबई में अलग-अलग लड़े सहयोगी
मुंबई में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा, जबकि महायुति में शामिल अजित पवार की एनसीपी अलग चुनाव मैदान में उतरी। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने शरद पवार के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन किया, लेकिन इसका खास असर नहीं दिखा।
अन्य महानगरपालिकाओं में भी महायुति का दबदबा
राज्य की कई बड़ी नगरपालिकाओं में बीजेपी और शिंदे गुट ने कांग्रेस और विपक्षी दलों को पीछे छोड़ दिया।
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नागपुर में बीजेपी ने 100 से ज्यादा सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की
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पुणे और पिंपरी-चिंचवड में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी
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नवी मुंबई, वसई-विरार, नासिक, सोलापुर और जलगांव में भी महायुति का दबदबा रहा
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कल्याण-डोंबिवली और ठाणे में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) की मजबूत पकड़ दिखी
हालांकि लातूर, चंद्रपुर और कोल्हापुर जैसे कुछ नगर निगमों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कुल मिलाकर राज्यभर में विपक्ष बिखरा नजर आया।
ठाकरे भाइयों का प्रयोग नहीं चला
करीब दो दशक बाद साथ आए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का राजनीतिक प्रयोग अपेक्षित असर नहीं दिखा सका। कई शहरी इलाकों में मनसे और उद्धव गुट सीमित सीटों पर ही सिमट गए। इससे साफ है कि शहरी मतदाता ने इस बार स्थिरता और सत्ता में बैठे गठबंधन को तरजीह दी।
महायुति के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त
इन नतीजों को 2022 में शिवसेना विभाजन के बाद पहला बड़ा शहरी जनादेश माना जा रहा है। 29 महानगरपालिकाओं में मिली बढ़त से महायुति को न सिर्फ स्थानीय स्तर पर मजबूती मिली है, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले यह जीत उनके लिए बड़ा मनोबल साबित हो सकती है।
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