जानें-2019 से 2025 तक कैसे बदला भारत का इनकम टैक्स सिस्टम

जुबिली स्पेशल डेस्क

नई दिल्ली. पिछले कुछ सालों में भारत के इनकम टैक्स सिस्टम में कई अहम बदलाव हुए हैं, जिन्होंने न सिर्फ टैक्स भरने का तरीका बदल दिया, बल्कि आम आदमी की जेब में ज्यादा पैसा भी बचाया। 2019 से 2025 के बीच सरकार ने पुराने जटिल नियम हटाकर एक ऐसा सरल और समझने में आसान सिस्टम तैयार किया है।

पहले लोग टैक्स बचाने के लिए LIC, PF और होम लोन के पीछे भागते थे, लेकिन अब सिस्टम छूट (deductions) के बजाय कम टैक्स रेट पर केंद्रित है।

2019-2020: सुधार की शुरुआत

2019 में सरकार ने घर खरीदने वालों को होम लोन पर अतिरिक्त छूट दी। इसके तुरंत बाद 2020 में ‘नया इनकम टैक्स सिस्टम’ लागू हुआ। इसमें टैक्स रेट तो कम रखे गए, लेकिन निवेश पर मिलने वाली छूट को हटा दिया गया। इसका उद्देश्य एक ऐसा सिस्टम बनाना था जिसमें कागजी कार्रवाई कम और प्रक्रिया आसान हो।

साथ ही फेसलेस असेसमेंट लागू किया गया। अब टैक्सपेयर को इनकम टैक्स ऑफिस में जाने की जरूरत नहीं रही। सभी केस ऑनलाइन अलॉट किए गए और सुनवाई भी डिजिटल हुई। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ और सिस्टम पर भरोसा बढ़ा।

2023-2024: मिडिल क्लास की राहत

2023 के बजट ने नए टैक्स सिस्टम को डिफ़ॉल्ट बनाया और 7 लाख रुपये तक की सालाना कमाई को पूरी तरह टैक्स फ्री किया। 2024 में पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को आसान भाषा में दोबारा लिखने की प्रक्रिया शुरू हुई। कैपिटल गेन टैक्स को भी सरल किया गया, जिससे शेयर और प्रॉपर्टी बेचने वाले टैक्सपेयर परेशान न हों।

2025 का बजट: सबसे बड़ी राहत

2025 में नई टैक्स व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की सालाना कमाई को टैक्स फ्री करने का प्रस्ताव आया। इसे मिडिल क्लास के लिए बड़ा वरदान माना गया। अब 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने वाला है, जिसका उद्देश्य है कि आम आदमी खुद आसानी से अपना टैक्स समझ सके और कानूनी जटिलताएं कम हों।

बजट 2026 से उम्मीद

अब ज्यादातर टैक्सपेयर नए सिस्टम को अपना चुके हैं। बिना किसी निवेश के भी टैक्स बच रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार इन सुधारों को स्थिर रखेगी और 2026-27 के बजट में इन्हें और बेहतर बनाने की दिशा में काम होगा।

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