SAIL चेयरमैन ने दिया इस्तीफा? आधिकारिक चुप्पी, अनौपचारिक हलचल!

विवेक अवस्थी
नई दिल्ली, देश की सबसे बड़ी स्टील कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के चेयरमैन अमरेंदु प्रकाश के कथित इस्तीफे की अफवाहों ने इस्पात मंत्रालय के गलियारों में हड़कंप मचा रखा है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से कथित मतभेद के बाद चेयरमैन ने पद छोड़ने का फैसला लिया हो सकता है, लेकिन आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है।
आधिकारिक तौर पर सब कुछ शांत है – न कोई इस्तीफा पत्र सार्वजनिक हुआ, न कोई घोषणा। लेकिन अनौपचारिक बातचीत में हर कोई “पुख्ता सूत्रों” का हवाला देकर दावे कर रहा है। मंत्रालय में अफवाहों की भट्टी पूरी तरह गर्म है। सूत्र बताते हैं कि मामला प्रदर्शन से जुड़ा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अहंकार की टक्कर का है। कुछ महीने पहले दिल्ली में एक बंद कमरे की बैठक में उसी वरिष्ठ नौकरशाह ने कथित तौर पर चेयरमैन को “अपनी सीमा में रहने” की फटकार लगाई थी, जिससे अन्य PSU प्रमुख भी हक्के-बक्के रह गए।
दिलचस्प बात यह है कि एक अन्य स्टील PSU के CMD को भी इसी अधिकारी से टकराव के बाद रास्ता दिखाया गया था। क्या यह सिर्फ संयोग है या एक पैटर्न?

मजबूत प्रदर्शन के बावजूद विवादों का साया
अमरेंदु प्रकाश का कार्यकाल रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन से चमक रहा है। दिसंबर में SAIL ने अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की, जबकि अप्रैल-दिसंबर FY26 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। फिर भी अफवाहें थम नहीं रही हैं। PSU-मंत्रालय के रिश्तों में अच्छे नतीजे हमेशा सुरक्षा कवच नहीं बन पाते।
फोन कॉल पर सन्नाटा
indianpsu.com ने SAIL चेयरमैन अमरेंदु प्रकाश, इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक और कंपनी की कॉरपोरेट कम्युनिकेशन टीम से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। नौकरशाही में यह “रेडियो साइलेंस” अक्सर प्रेस रिलीज से ज्यादा कुछ बयान कर जाता है।
व्हिसलब्लोअर मामला और ₹800 करोड़ का आरोप
प्रकाश का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है। सबसे बड़ा मुद्दा SAIL के वरिष्ठ अधिकारी राजीव भाटिया द्वारा लगाया गया ₹800 करोड़ के कथित घोटाले का आरोप। इसमें नीतियों में हेरफेर, ड्यू डिलिजेंस की चूक और चुनिंदा निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की बातें शामिल थीं।
लोकपाल के निर्देश पर जांच शुरू हुई और 2024 की शुरुआत में कई अधिकारियों को निलंबित किया गया। मुख्य आरोप:
- चेयरमैन पर ₹70 लाख की कानूनी फीस उन वकीलों को देने का इल्जाम, जिन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व अधिकारियों की पैरवी की।
- निलंबन रद्द करने और वेतन भुगतान में मंत्रालय के निर्देशों की कथित अवहेलना।
- CBI जांच के दौरान अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनाती और पदोन्नति।
भाटिया ने चेयरमैन को सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
क्या हुआ इस्तीफा?
फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। सार्वजनिक डोमेन में कोई इस्तीफा नहीं, कोई आधिकारिक बयान नहीं। सिर्फ फुसफुसाहटें और अनुमान। सत्ता के गलियारे गूंज रहे हैं, लेकिन फोन उठ नहीं रहे। अफवाहों की यह भट्टी कब ठंडी पड़ेगी, यह देखना बाकी है।
(सूत्रों के आधार पर। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार।)
(विवेक अवस्थी वारित पत्रकार और indianpsu.com के संपादक हैं, यह लेख indianpsu.com में प्रकाशित समाचार का हिंदी अनुवाद है)



