जुबिली न्यूज डेस्क
म्यांमार आज अपने आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। लगातार गृह युद्ध, उच्च इन्फ्लेशन, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और प्राकृतिक आपदाओं ने देश की वित्तीय स्थिति को और बिगाड़ दिया है। इसी बीच, भारत ने म्यांमार को अब तक कितनी आर्थिक मदद दी है, यह जानना अहम है।

भारत ने म्यांमार को कितनी सहायता दी
2026 तक भारत से म्यांमार के लिए कुल विकास सहायता पोर्टफोलियो 1.75 बिलियन डॉलर से अधिक का है। इसमें चुकाने योग्य ऋण (लॉन्स) और गैर चुकाने योग्य अनुदान दोनों शामिल हैं।
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सॉफ्ट लोन (745 मिलियन डॉलर) – लंबी अवधि और कम ब्याज दर वाले ऋण, जिनका उद्देश्य बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
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अनुदान (₹350 करोड़, केंद्रीय बजट 2025-26) – यह प्रत्यक्ष सहायता है, जिसे म्यांमार को चुकाना नहीं होता।
भारत का पैसा म्यांमार में कहां इस्तेमाल हुआ
भारत की वित्तीय मदद मुख्य रूप से रणनीतिक और विकास परियोजनाओं में लगी है:
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कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट – भारत के पूर्वोत्तर को म्यांमार के सितवे बंदरगाह से जोड़ता है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया तक व्यापार आसान होगा।
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भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग – क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार।
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यांगून मांडले रेलवे अपग्रेड – रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए भारतीय ऋण से सहायता।
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थाटे चाउंग जल-विद्युत परियोजना – 100 मेगावाट की ऊर्जा पहल, लगभग 60 मिलियन डॉलर के ऋण से फंड की गई।
क्या म्यांमार भारत को अपना कर्ज चुका रहा है?
वर्तमान में म्यांमार अपने बाहरी कर्ज का भुगतान करने में संघर्ष कर रहा है।
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2022 में म्यांमार का केंद्रीय बैंक विदेशी ऋणों पर भुगतान को निलंबित कर चुका था, जिससे भारतीय लाइंस ऑफ क्रेडिट पर भुगतान में देरी हुई।
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इसके बावजूद, भारत ने लंबी अवधि की क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए चर्चा में भाग लेने की इच्छा जताई है।
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भारत ने जी-20 डेट सर्विस सस्पेंशन इनिशिएटिव के तहत म्यांमार को पहले ही कर्ज राहत दी है और कुछ सहायता को अनुदान में बदल दिया।
भारत म्यांमार की आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए विकास सहायता और ऋण जारी रख रहा है। हालांकि, म्यांमार की आर्थिक कठिनाइयाँ अभी भी कर्ज भुगतान में बाधा डाल रही हैं, लेकिन भारत ने लंबी अवधि के सहयोग और कर्ज राहत के माध्यम से समर्थन जारी रखा है।
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