- कर्नाटक में सत्ता संतुलन पर सहमति! सिद्धारमैया
- डीके शिवकुमार की ब्रेकफास्ट मीटिंग से निकला समझौता फॉर्मूला
जुबिली स्पेशल डेस्क
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच कई महीनों से चल रही सत्ता-साझेदारी की खींचतान अब समाधान की ओर बढ़ती दिख रही है।
शनिवार को दोनों नेताओं की ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस हाईकमान के हस्ताक्षर के बाद एक समझौता फॉर्मूला लागू हो सकता है। इससे कर्नाटक का सियासी ड्रामा फिलहाल थमने की उम्मीद बढ़ गई है।
तनाव कम करने की कोशिश, ब्रेकफास्ट मीटिंग बनी टर्निंग पॉइंट
सिद्धारमैया और शिवकुमार की मुलाकात को महज औपचारिकता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आपसी तनाव कम करने का बड़ा प्रयास बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सत्ता के सुचारु हस्तांतरण पर भी बातचीत हुई है। तय योजना के अनुसार, डीके शिवकुमार को मार्च–अप्रैल तक मुख्यमंत्री बनाए जाने की पूरी संभावना है।

समझौते की शर्तें: डीके रहेंगे शांत, वफादारों को मिलेंगे मंत्रीपद
सूत्र बताते हैं कि इस फॉर्मूले के तहत शिवकुमार को सत्ता हस्तांतरण तक सार्वजनिक बयानबाजी से दूरी बनाए रखनी होगी और उपमुख्यमंत्री पद से ही संतोष करना होगा।
बदले में, उनके समर्थक विधायकों को कैबिनेट में अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। साथ ही, वह कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में भी बने रहेंगे।
2028 में डीके को सिद्धारमैया का समर्थन
समझौते के अनुसार, 2028 के विधानसभा चुनावों में सिद्धारमैया डीके शिवकुमार की नेतृत्व भूमिका का समर्थन करेंगे। सिद्धारमैया पहले ही साफ कर चुके हैं कि यह उनका अंतिम कार्यकाल होगा। सूत्रों का कहना है कि वह अपनी राजनीतिक विरासत को मजबूत करके सम्मानजनक विदाई चाहते हैं।
दोनों पक्षों के लिए समझौता क्यों जरूरी?
डीके शिवकुमार के पास फिलहाल पर्याप्त संख्या बल नहीं है, इसलिए तत्काल सत्ता परिवर्तन उनके लिए संभव नहीं। उधर, सिद्धारमैया को अनिश्चित तरीके से हटाना कांग्रेस के लिए राजनीतिक जोखिम बन सकता है। ऐसे में यह समझौता दोनों पक्षों के लिए सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है।
समझौता सफल होगा या नहीं? इन तीन बातों पर टिका गणित
-
विश्वास का सवाल: क्या शिवकुमार सिद्धारमैया की प्रतिबद्धता पर भरोसा कर पाएंगे?
-
हाईकमान की भूमिका: क्या कांग्रेस आलाकमान समय पर सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित कर पाएगा?
-
जातीय संतुलन: सिद्धारमैया ‘अहिंदा’ राजनीति का बड़ा चेहरा हैं, जबकि शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय का नेतृत्व करते हैं। किसी को भी नाराज़ करना कांग्रेस के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
“हम एक हैं”- ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद संयुक्त बयान
बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है। सिद्धारमैया ने कहा “कुछ गलतफहमियां थीं, इसलिए साथ बैठे और बातें स्पष्ट कीं। हमारा लक्ष्य 2028 का विधानसभा चुनाव जीतना है।”दोनों नेताओं ने कहा कि हाईकमान का फैसला अंतिम होगा और वे उसी के अनुसार काम करेंगे।
Jubilee Post | जुबिली पोस्ट News & Information Portal
