जुबिली स्पेशल डेस्क
अफगानिस्तान पिछले 48 घंटों में दो महाशक्तियों-अमेरिका और चीन की टकराहट के बीच गहरे संकट में फंस गया है। एक तरफ अमेरिका में व्हाइट हाउस के पास हुए हमले का संदिग्ध अफगान नागरिक निकला, तो दूसरी तरफ अफगान क्षेत्र से ताजिकिस्तान में ड्रोन हमला किया गया, जिसमें तीन चीनी कामगारों की मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं के बाद अफगानिस्तान अचानक वॉशिंगटन और बीजिंग—दोनों की रडार पर आ गया है।
अमेरिका में हमला, संदिग्ध अफगान नागरिक
बुधवार को व्हाइट हाउस के पास दो नेशनल गार्ड पर हमला हुआ। इस हमले में एक गार्ड की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल है। जांच में संदिग्ध के तौर पर अफगान नागरिक रहमानउल्लाह लकनवाल का नाम सामने आया है।
CIA ने पुष्टि की है कि लकनवाल ने अफगानिस्तान में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के लिए काम किया था और 2021 में पश्चिमी सेनाओं की वापसी के बाद अमेरिका पहुंचा था।
अमेरिका का बड़ा कदम
हमले के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की कि अफगान पासपोर्ट धारकों को फिलहाल वीजा जारी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी आव्रजन विभाग ने भविष्य के सभी असाइलम मामलों की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी है। अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका की पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा है।
अफगान भूमि से चीन के नागरिकों पर हमला
दूसरी ओर, ताजिकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव बढ़ गया है। हाल ही में अफगान क्षेत्र से ताजिकिस्तान के खतलोन प्रांत में ड्रोन हमला किया गया। यह हमला शाहीन एसएम गोल्ड माइन कंपनी पर हुआ, जहां तीन चीनी मजदूरों की मौत हो गई।
चीन की प्रतिक्रिया
ताजिकिस्तान स्थित चीनी दूतावास ने हमले की कड़ी निंदा की और इसे गंभीर अपराध करार दिया। दूतावास ने ताजिकिस्तान में रहने वाले चीनी नागरिकों को सतर्क रहने,सुरक्षा परिस्थितियों पर नजर बनाए रखने,और अफगान सीमा के पास यात्रा या काम से बचने की सलाह दी है। साथ ही वहां मौजूद चीनी नागरिकों से क्षेत्र छोड़ने का आग्रह किया गया है। चीन ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए ताजिक अधिकारियों से हमले की गहन जांच की मांग की है।
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