ये वीडियो कर सकता है विपक्ष परेशान…

जुबिली स्पेशल डेस्क

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर शरद पवार भी खास तौर पर मौजूद थे। सोशल मीडिया पर शरद पवार और पीएम मोदी का एक वीडियो काफी सुर्खियो में है।

अब सवाल है कि उस वीडियो में ऐसा क्या है जिसकी चर्चा खूब तारीफ हो रही है। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखने के बाद पीएम मोदी की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।

हालांकि इस वीडियो को देखने के बाद विपक्ष को टेंशन हो सकती है। दरअसल पीएम मोदी और शरद पवार जिस अंदाज में मिले वो विपक्ष को टेंशन देने का काम कर सकता है।

वीडियो आप देख सकते हैं कि पीएम मोदी 84 वर्षीय पवार को कुर्सी पर बैठने में मदद करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पीएम मोदी ने न सिर्फ पवार को आराम से बैठने में मदद की, बल्कि उन्हें पानी का गिलास भी दिया। यह देखकर दर्शकों ने तालियों से उनका अभिनंदन किया।

 

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित मराठी भाषा के इस भव्य आयोजन में सभी मराठियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन किसी भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इस सम्मेलन में आजादी की लड़ाई की महक के साथ-साथ महाराष्ट्र और राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत भी है।

मोदी ने कहा कि अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन 1878 में अपने पहले आयोजन से लेकर अब तक भारत की 147 वर्षों की यात्रा का साक्षी रहा है।

उन्होंने कहा कि श्री महादेव गोविंद रानाडे, श्री हरि नारायण आप्टे, श्री माधव श्रीहरि अणे, श्री शिवराम परांजपे, श्री वीर सावरकर जैसी देश की अनेक महान विभूतियों ने इसकी अध्यक्षता की है। उन्होंने  शरद पवार द्वारा इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए देश और दुनिया भर के सभी मराठी प्रेमियों को इस आयोजन के लिए बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित करते हुए कि आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है, कहा कि मराठी भाषा के बारे में सोचते समय संत ज्ञानेश्वर के वचन याद आना बहुत स्वाभाविक है। संत ज्ञानेश्वर के एक पद्य की व्‍याख्‍या करते हुए श्री मोदी ने कहा कि मराठी भाषा अमृत से भी बढ़कर मीठी है। इसलिए मराठी भाषा और मराठी संस्कृति के प्रति उनका प्रेम और स्नेह अपार है। उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा कि हालांकि वे इस कार्यक्रम में मौजूद मराठी विद्वानों जितने प्रवीण नहीं हैं, लेकिन वह मराठी सीखने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं।

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