दलित महिला का नाम काटना अधिकारियों को पड़ा भारी! जानें फिर क्या हुआ

जुबिली न्यूज डेस्क

चुनावों के दौरान अक्सर मतदाता सूची से नाम गायब होने के मामले सामने आते रहते  हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की एक महिला का नाम वोटर लिस्ट से काटना अधिकारियों को भारी पड़ गया। दलित महिला ने यूपी में मतदाता सूची से अपना नाम गायब पाने के बाद अदालत में लड़ाई लड़ी।

वोटर लिस्ट से दलित महिला का नाम गायब

बता दे कि गौतम बुद्ध नगर जिले के रोशनपुर गांव की रहने वाली हेमलता घर और खेत का काम देखती हैं, जबकि उनके पति महेंद्र कुमार एक मजदूर हैं। हेमलता का कहना है कि उनका नाम 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से हटा दिया गया था। उनका कहना है, “वे मतदाता सूची से मेरा नाम कैसे हटा सकते हैं? क्या मैं मर गई हूं? आज आप मुझे वोट नहीं देने दे रहे हैं, कल आप राशन कार्ड से मेरा नाम हटा सकते हैं, फिर जमीन के रिकॉर्ड से, यह अन्याय कब खत्म होगा?

हेमलता ने साल 2022 में अदालत का रुख किया कि उसे जाति के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ा, जिसके बाद एससी/एसटी कोर्ट के आदेश के बाद गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने मंगलवार को तीन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की।

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SDM सहित 5 के खिलाफ FIR

23 नवंबर, 2022 को विशेष न्यायाधीश ज्योत्सना सिंह ने पुलिस को तत्कालीन अनुविभागीय मजिस्ट्रेट और दो तहसीलदारों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। फैसले के 60 दिन बाद दनकौर पुलिस ने पूर्व सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट रजनीकांत, तत्कालीन तहसीलदार विनय कुमार भदौरिया और अखिलेश सिंह के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की। इसके अलावा FIR में 4-5 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

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